हाइलाइट्स
• नाना पाटेकर के 5 डायलॉग आज भी हैं बेहद लोकप्रिय
• ‘क्रांतिवीर’ के डायलॉग ने मचाई थी जबरदस्त धूम
• ‘वेलकम’ का डायलॉग आज भी मीम्स में छाया
• ‘परिंदा’ और ‘यशवंत’ के डायलॉग भी रहे यादगार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई 57वीं GST काउंसिल की बैठक में कारोबारियों, MSME और छोटे करदाताओं के लिए कई अहम फैसले लिए गए। काउंसिल ने कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्तियों पर नियंत्रण के साथ आपराधिक अभियोजन शुरू करने की न्यूनतम सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी।
काउंसिल के फैसलों का जोर कर अनुपालन को आसान बनाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और गैर-जरूरी आपराधिक कार्रवाइयों पर रोक लगाने पर रहा। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान और सेवाएं बेचने वाले छोटे करदाताओं के GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की सिफारिश की गई है।
10,000 रुपये से कम के टैक्स नोटिस पर बड़ा फैसला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को GST परिषद की सिफारिशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नोटिस और कार्रवाई के लिए कॉमन स्टैंडर्ड तय करने की सिफारिश की गई है।
अब 10,000 रुपये या उससे कम की मौद्रिक सीमा वाले नए नोटिस जारी नहीं किए जाएंगे। इस सीमा से कम के सभी लंबित नोटिस भी वापस लिए जाएंगे। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए ऐसे नोटिस भी वापस लिए जाएंगे।
इस फैसले का उद्देश्य छोटे मामलों से करदाताओं पर पड़ने वाले बोझ को कम करना और GST प्रणाली में अधिक स्पष्टता लाना है।
57वीं GST काउंसिल में रिफंड और कर्मचारियों से जुड़े फैसले
बैठक में रिफंड दावों को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का फैसला किया गया है। कर्मचारियों के लिए लिए गए इंश्योरेंस कवर पर भुगतान किए गए GST पर नियोक्ताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट देने का प्रावधान भी किया गया है।
इसके अलावा GST काउंसिल ने नोटिस और कर संबंधी कार्यवाही के लिए कॉमन स्टैंडर्ड की सिफारिश की है।
GST दरों में कोई बदलाव नहीं
57वीं GST काउंसिल की बैठक में किसी भी GST दर में बदलाव नहीं किया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि आगे दर से जुड़े मुद्दों पर साल में एक बार विचार किया जाएगा।
सरकार CGST में फेसलेस टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है।
छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को क्या राहत?
काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान या सेवाएं बेचने वाले छोटे करदाताओं के GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान करने की सिफारिश की है।
करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को हर राज्य में भौतिक उपस्थिति के बिना प्लेटफॉर्म वेयरहाउस को व्यवसाय के स्थान के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति दी गई है। इससे वेयरहाउस आधारित ई-कॉमर्स मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में आसानी होगी।
वहीं, अनरजिस्टर्ड राइडर डिलीवरी सेवाओं पर GST दर को 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
कारोबारियों के लिए गिरफ्तारी और अभियोजन के नियम बदले
GST अधिकारियों की निर्दिष्ट मामलों में मनमानी गिरफ्तारी शक्तियों को समाप्त या सीमित कर दिया गया है। इसके साथ ही आपराधिक मुकदमा शुरू करने की न्यूनतम सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
इस बदलाव से मामूली या गैर-गंभीर कर मामलों में आपराधिक कार्यवाही का जोखिम कम होगा।
शो-कॉज नोटिस जारी करने के लिए भी न्यूनतम 10,000 रुपये की सीमा तय की गई है। इसके तहत 10,000 रुपये से कम की टैक्स राशि के लिए GST डिमांड नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
MSME, ई-कॉमर्स और दूसरे क्षेत्रों पर असर
काउंसिल के मुताबिक इन सुधारों का असर MSME और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। मुकदमों के डर में कमी और नियमों के सरल होने से छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी अनलॉक होने और प्रशासनिक लागत घटने की उम्मीद है।
ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए वेयरहाउस आधारित मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में आसानी होगी। डिलीवरी राइडर्स पर टैक्स कम होने से सेवाओं की लागत घटेगी।
साथ ही सप्लायर द्वारा डिफॉल्ट करने की स्थिति में प्रामाणिक खरीदारों और करदाताओं के इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC को सुरक्षा देने और रिफंड प्रक्रिया को तेज करने के उपाय भी प्रस्तावित किए गए हैं।
रियल एस्टेट और आतिथ्य क्षेत्र में प्रक्रियात्मक जटिलताओं में कमी और ITC दावे में स्पष्टता आने से नकद प्रवाह में सुधार तथा नई परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की बात कही गई है।
GST सुधारों से टैक्स सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा?
GST 2.0 की दिशा में उठाए गए इन कदमों का जोर केवल टैक्स रेट तय करने के बजाय अनुपालन में स्पष्टता और स्थिरता पर है। कर विशेषज्ञों के मुताबिक विवादों में कमी, रिफंड में तेजी और पारदर्शी व्यवस्था से कारोबारों को दीर्घकालिक विस्तार और क्षमता निर्माण के लिए अधिक स्पष्टता मिलेगी।
इन सुधारों का ढांचा भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ने में मदद करेगा।