जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी के फैसले से हलचल मच गई है। उन्होंने समर्थकों की मौजूदगी में जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होने का एलान कर दिया। सभा को संबोधित करते हुए रुहुल्ला ने साफ कहा कि अब वह पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा।
मंच से किया पार्टी छोड़ने का एलान
सभा में पहुंचे लोगों का आभार जताते हुए आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने कहा, 'मैं आप सबका शुक्रगुजार हूं कि आप यहां आए। यहां कुर्सी संभालनी नहीं, बल्कि कुर्सी से उतरना था।'
उन्होंने बताया कि दोपहर 2:40 बजे तक वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ थे, लेकिन अब खुद को पार्टी से अलग कर रहे हैं। उनके इस एलान के बाद वहां मौजूद समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों ने 'टाइगर-टाइगर, रुहुल्ला टाइगर' के नारे लगाकर उनके प्रति समर्थन जताया।
रुहुल्ला ने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपते हुए उनसे इसे अपने हाथों संबंधित लोगों तक पहुंचाने को कहा। अशरफ मट्टू के बेटे तुफैल मट्टू की वर्ष 2010 में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में पुलिस फायरिंग के दौरान मौत हो गई थी।
समर्थकों ने पार्टी पर लगाए वादे पूरे नहीं करने के आरोप
सभा में मौजूद लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। समर्थकों के मुताबिक, अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली के साथ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर पार्टी ने वादे किए थे। उनका कहना था कि सत्ता में आने के बाद इन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मागाम के रहने वाले मोहम्मद शफी ने कहा कि पार्टी ने पिछले एक साल में लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने 200 यूनिट मुफ्त बिजली और एक लाख नौकरियों के वादे पूरे नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।
वहीं, उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के सोनावारी से पहुंचे हयात हुसैन ने कहा कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में रुहुल्ला ने पार्टी के लिए जमकर प्रचार किया था। लेकिन सत्ता मिलने के बाद पार्टी ने उनके योगदान और जनता की उम्मीदों को नजरअंदाज कर दिया।
नौ साल का बच्चा भी पहुंचा समर्थन जताने
सभा में रुहुल्ला के समर्थन में नौ साल का एक बच्चा भी तख्ती लेकर पहुंचा। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले दायम रजा की तख्ती पर उर्दू में लिखा था, 'वादा कुर्सी से बड़ा है।' वह अपने पिता और दादा के साथ श्रीनगर के हरवान इलाके से आया था।
दायम रजा ने रुहुल्ला को ईमानदार और अच्छा नेता बताते हुए उनके समर्थन की बात कही। उसके दादा मोहम्मद रफीक ने भी कहा कि रुहुल्ला जनता की आवाज उठाते हैं और सच बोलने का साहस रखते हैं।
समर्थकों का मानना है कि रुहुल्ला ने पार्टी छोड़ने का फैसला सोच-विचार के बाद लिया है। उनके मुताबिक, रुहुल्ला के लिए पद और सत्ता से ज्यादा जनता का भरोसा और उनके मुद्दे अहम हैं। लोगों ने उम्मीद जताई कि जनता के अधिकारों की लड़ाई में वे उनके साथ खड़े रहेंगे।
पिता की बरसी के दिन लिया राजनीतिक फैसला
3 नवंबर की तारीख आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी और उनके परिवार के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। इसी दिन वर्ष 2000 में उनके पिता आगा सैयद मेहदी की आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई थी।
पिता की बरसी के मौके पर आयोजित सभा में रुहुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने का एलान किया। उनके इस फैसले के बाद समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला और जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।