हाइलाइट्स :
• हिमांशु ढिल्लन ने 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में जीता सिल्वर
• एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु के खाते में अब तक दो सिल्वर मेडल
• जींद की स्थानीय शूटिंग रेंज से शुरू हुआ था निशानेबाजी का सफर
• चाचा हरदीप सिंह ढिल्लन रहे हैं प्रतिष्ठित पहलवान और ओलंपियन
• परिवार ने हिमांशु के शूटिंग करियर के लिए अपनी जमा-पूंजी तक लगाई
एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले हिमांशु ढिल्लन का सफर खास है। हरियाणा के जींद जिले से आने वाले हिमांशु ऐसे परिवार से हैं, जहां कुश्ती का गहरा जुड़ाव रहा है। उनके चाचा हरदीप सिंह ढिल्लन प्रतिष्ठित पहलवान और ओलंपियन रहे हैं।
बचपन में हिमांशु ने अपने चाचा को देश के लिए खेलते और पदक जीतते देखा। इसके बावजूद उन्होंने कुश्ती के बजाय निशानेबाजी को अपना करियर चुना। पहली बार शूटिंग गन हाथ में लेने के बाद ही उन्होंने इस खेल में आगे बढ़ने का लक्ष्य तय कर लिया था।
परिवार ने सपने के लिए लगा दी जमा-पूंजी
शूटिंग में राइफल, उपकरण और विशेषज्ञ ट्रेनिंग की जरूरत होती है। हिमांशु के परिवार ने उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए अपनी जमा-पूंजी तक लगा दी।
हिमांशु ने जींद की स्थानीय शूटिंग रेंज से अभ्यास शुरू किया। घंटों की ट्रेनिंग के साथ उन्होंने एकाग्रता और नियंत्रण पर काम किया। ध्यान और अनुशासन भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बने।
इस मेहनत का नतीजा जूनियर स्तर की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मिला, जहां उन्होंने पदक जीते और जूनियर भारतीय शूटिंग टीम में जगह बनाई। वह जूनियर एशियन चैंपियन भी बने। ट्रेनिंग के साथ हिमांशु ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई भी की।
2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान
साल 2026 की शुरुआत में चीन के हांगझोउ में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में हिमांशु ने सोनम मस्कर के साथ मिक्स्ड टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
इसके बाद एशियन गेम्स 2026 में उनका प्रदर्शन और आगे बढ़ा। आइची-नागोया एशियन गेम्स में उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल किया।
फाइनल में हिमांशु ने 252.4 अंक हासिल किए। चीन के शेन लिहाओ ने एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारत के रुद्रांक्ष पाटिल ने कांस्य पदक अपने नाम किया।
एशियन गेम्स में हिमांशु के खाते में दो सिल्वर
हिमांशु की उपलब्धि व्यक्तिगत स्पर्धा तक सीमित नहीं रही। उन्होंने रुद्रांक्ष पाटिल और पार्थ माने के साथ पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी भारत को सिल्वर मेडल दिलाया।
इस तरह एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु के खाते में अब तक दो सिल्वर मेडल हैं—एक व्यक्तिगत स्पर्धा में और दूसरा टीम इवेंट में।
चाचा ने सिखाया 'चैंपियन माइंडसेट'
हरदीप सिंह ढिल्लन ने हिमांशु को शूटिंग की तकनीकी ट्रेनिंग नहीं दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खेल के दबाव से निपटने की मानसिक तैयारी जरूर कराई।
उन्होंने हिमांशु को दबाव में शांत रहने और हार से सीखने की आदत डाली। हरदीप सिंह की सीख थी, 'जब तुम पोडियम पर होते हो, तो दबाव सिर्फ तुम्हारे ऊपर नहीं, तुम्हारे विरोधी पर भी होता है। जो उस पल में शांत रह गया, वही सिकंदर है।'
हरदीप सिंह ने हिमांशु को 'नो एक्सक्यूज' वाला अनुशासन भी सिखाया। मौसम या किसी दूसरी परेशानी को ट्रेनिंग छोड़ने का बहाना न बनाने और हार के बाद चूके हुए शॉट्स का विश्लेषण करने की सीख ने हिमांशु के खेल को परिपक्व बनाने में भूमिका निभाई।
जींद से शुरू हुआ हिमांशु का सफर अब एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच चुका है। व्यक्तिगत स्पर्धा के सिल्वर और टीम इवेंट के सिल्वर के साथ उन्होंने निशानेबाजी में अपनी पहचान मजबूत की है।