कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन आगे भी चलता रहेगा। उन्होंने साफ किया कि जेल में रहने या बाहर आने से आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्राइम ब्रांच के नोटिस पर क्या बोले आशुतोष रांका?
शुक्रवार को सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरभ दास, राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्न सिंह मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। इससे एक दिन पहले इन नेताओं ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
इन नेताओं को गुरुवार दोपहर राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होना था। पुलिस स्टेशन से बाहर निकलने के बाद रांका ने बताया कि उन्हें अभी अगली तारीख नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि पहली तारीख पर पेश नहीं हो पाने की सूचना पुलिस को दे दी गई थी। अधिकारियों ने समय की पुष्टि करने की बात कही है, इसलिए वे क्राइम ब्रांच के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
रांका के मुताबिक, शुक्रवार को न्यायिक हिरासत से रिहाई के बाद उनके मुचल्कों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो गई। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया ठीक रही और उन्हें नवंबर के तीसरे सप्ताह की अगली तारीख दी गई है।
'जेल के अंदर हों या बाहर, आंदोलन रहेगा जारी'
आंदोलन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि वे खुद को नेता नहीं, बल्कि उस मंच का संरक्षक मानते हैं, जो देश के लोगों ने उन्हें दिया है। उन्होंने कहा कि वे अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।
रांका ने यह भी कहा कि जेल के अंदर रहने या बाहर होने, दोनों ही स्थितियों में आंदोलन जारी रहेगा। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें अपने बारे में और शासन प्रणाली के कामकाज को लेकर काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने जरूरी बदलाव करने की बात भी कही।
क्या है CJP नेताओं से जुड़ा पूरा मामला?
सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे। दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन से जुड़े उनके खिलाफ दर्ज मामलों को हाल ही में क्राइम ब्रांच को सौंपा है।
यह मामला 13 अक्टूबर की घटना से जुड़ा है। उस दिन सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत 14 लोग जंतर-मंतर में दाखिल हुए थे। जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाइड कर दिया गया है। इस दौरान पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया था।
अजिंक्य शिंदे को पहले ही जमानत बांड पर रिहा कर दिया गया था, जबकि सौरभ दास और आशुतोष रांका को एक सप्ताह न्यायिक हिरासत में बिताना पड़ा था। अब सीजेपी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है।