- नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास तट से टकराया मुरासु
- 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चले तेज हवाओं के झोंके
- पेड़ और बिजली के खंभे उखड़े, कई इलाकों में जलभराव
- अमित शाह ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को केंद्र की मदद का भरोसा दिया
- अगले 24 से 48 घंटे बारिश और बाढ़ जैसे हालात की आशंका
|
Cyclone Murasu Andhra Pradesh: बंगाल की खाड़ी से उठा गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु मंगलवार तड़के आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट से टकरा गया। ओंगोल के पास नेल्लोर और नरसापुर के बीच चक्रवात का लैंडफॉल हुआ। इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जबकि हवा के झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। तूफान के कारण तटीय जिलों में हजारों पेड़ उखड़ गए और सैकड़ों बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई इलाकों में जलभराव के साथ बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है।
रिपोर्टो के अनुसार मुरासु का सबसे ज्यादा असर प्रकाशम, बापटला, पलनाडु और गुंटूर जिलों में देखने को मिला है। कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश हुई। तटीय इलाकों में मकानों, मछली पकड़ने वाली नावों और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। तेज हवाओं से सड़कें पेड़ों और बिजली के खंभों के गिरने से बाधित हुईं। प्रशासन की टीमें रास्तों को साफ करने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने में जुटी हैं।
ओंगोल के पास 3:30 से 5:30 बजे के बीच लैंडफॉल
भारत मौसम विज्ञान विभाग IMD के मुताबिक, चक्रवात मुरासु ने तीन नवंबर की सुबह करीब 3:30 से 5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इसका लैंडफॉल ओंगोल के नजदीक प्रकाशम जिले में हुआ। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे।
चक्रवात के कारण कोठापटनम में सोमवार सुबह 8:30 बजे से मंगलवार सुबह पांच बजे तक 16.4 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। प्रकाशम जिले के नागुलुप्पलापाडु में 11.4 सेंटीमीटर और बापटला के चिराला में 10 सेंटीमीटर बारिश हुई। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
अगले 24 से 48 घंटे में क्या होगा असर?
चक्रवात के तट पार करने के बाद भी आंध्र प्रदेश के कई जिलों में मौसम का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, मुरासु की तीव्रता मंगलवार दोपहर तक धीरे-धीरे कम होकर चक्रवाती तूफान के स्तर पर आ सकती है। इसके बाद मंगलवार आधी रात तक इसके गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। यानी अगले कुछ घंटों में हवाओं की रफ्तार और तूफान की ताकत में कमी आ सकती है, लेकिन बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।
मंगलवार को तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका है। दक्षिणी तटीय जिलों में शाम तक तेज बारिश जारी रह सकती है। अगले एक-दो दिनों में इसका असर निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर पानी जमा होने और स्थानीय यातायात बाधित होने के रूप में दिखाई दे सकता है। बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचने से कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करने में भी समय लग सकता है। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलों को नुकसान का खतरा बना रहेगा।
तूफान के साथ समुद्र में उठने वाली लहरों को लेकर भी चेतावनी दी गई है। IMD ने बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों के निचले तटीय क्षेत्रों में खगोलीय ज्वार से 1 से 1.5 मीटर तक ऊंची तूफानी लहरों के कारण पानी भरने की आशंका जताई थी। मछुआरों को चार नवंबर तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
अमित शाह ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
चक्रवात से हुए नुकसान के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की। उन्होंने राज्य में तूफान के प्रभाव और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली। शाह ने सोशल मीडिया पर कहा कि केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें पहले से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और लोगों की मदद कर रही हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार इस मुश्किल समय में आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ खड़ी है। केंद्र की ओर से राहत और बचाव कार्यों में जरूरी सहयोग देने का भरोसा भी दिया गया है।
कर्नाटक ने भेजे राहत और बिजली बहाली के लिए संसाधन
चक्रवात से बिजली व्यवस्था को हुए नुकसान के बाद पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। कर्नाटक की ओर से 500 कुशल कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों को आंध्र प्रदेश भेजने की पहल की गई है, ताकि बिजली के खंभों और लाइनों को दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल की जा सके। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी राहत और बहाली कार्यों में हरसंभव सहयोग देने की बात कही है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस सहायता के लिए कर्नाटक सरकार और वहां के लोगों का आभार जताया।
राहत शिविरों में पहुंचाए गए प्रभावित लोग
तूफान के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था। राष्ट्रीय और राज्य आपदा मोचन बल की टीमें राहत-बचाव कार्यों में लगी हैं। प्रभावित इलाकों में पेड़ों और बिजली के खंभों को हटाने, सड़कों को खोलने तथा बिजली और संचार व्यवस्था बहाल करने पर जोर दिया जा रहा है।