नौसेना को मिलेंगे 8 नए अत्याधुनिक कॉर्वेट युद्धपोत, 53,866 करोड़ रुपये का करार

नौसेना को मिलेंगे 8 नए अत्याधुनिक कॉर्वेट युद्धपोत, 53,866 करोड़ रुपये का करार
  • नौसेना के लिए आठ नए कॉर्वेट युद्धपोतों का निर्माण होगा
  • रक्षा मंत्रालय ने 53,866.50 करोड़ रुपये का किया करार
  • GRSE पांच और गोवा शिपयार्ड तीन युद्धपोत बनाएंगे
  • युद्धपोतों में आधुनिक मिसाइल, हथियार और सेंसर प्रणाली होगी
  • परियोजना से अगले दस वर्षों में 532 लाख मानव-दिवस रोजगार का अनुमान

Indian Navy Next Generation Corvettes: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) युद्धपोतों के निर्माण और अधिग्रहण के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। ये युद्धपोत देश में ही तैयार किए जाएंगे। इनके निर्माण की जिम्मेदारी रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) को सौंपी गई है। GRSE पांच कॉर्वेट का निर्माण करेगी, जबकि शेष तीन युद्धपोत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तैयार करेगी। इस परियोजना को भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में 2 नवंबर 2026 को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना की खास बात यह है कि पहली बार भारतीय नौसेना स्वयं इन युद्धपोतों का स्वदेशी डिजाइन तैयार करेगी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इनका निर्माण करेंगे। इससे देश में युद्धपोतों के डिजाइन और निर्माण की स्वदेशी क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

इन नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट युद्धपोतों को अत्याधुनिक सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियों से लैस किया जाएगा। इनमें आधुनिक मिसाइलें, हथियार और उन्नत सेंसर प्रणाली लगाई जाएगी। इनकी क्षमता समुद्र में हवाई, सतही और पानी के भीतर होने वाले खतरों से निपटने की होगी। इससे भारतीय नौसेना को अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में सैन्य अभियान संचालित करने में मदद मिलेगी।

इन युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और निगरानी मजबूत होगी। इसके अलावा दुश्मन के सतही युद्धपोतों और पनडुब्बियों के खिलाफ अभियान चलाने, तटीय सुरक्षा मजबूत करने तथा समुद्र के निकटवर्ती क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ेगी। ये युद्धपोत समुद्री निगरानी और रणनीतिक क्षेत्रों में नौसेना की मौजूदगी बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा के लिहाज से भी इनकी भूमिका अहम होगी।

इस परियोजना का लाभ केवल भारतीय नौसेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे देश के रक्षा विनिर्माण और जहाज निर्माण उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसके तहत रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ निजी शिपयार्ड और भारतीय औद्योगिक भागीदारों को भी काम करने का अवसर मिलेगा। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अगले दस वर्षों में इन युद्धपोतों के निर्माण से शिपयार्ड में करीब 72 लाख मानव-दिवस का रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। वहीं, सहायक उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र में लगभग 460 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित हो सकता है। इस तरह पूरी परियोजना से कुल करीब 532 लाख मानव-दिवस के रोजगार को बढ़ावा मिलने का अनुमान है। इससे देश में रक्षा उपकरणों, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आवश्यक कलपुर्जों के निर्माण से जुड़े उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

परियोजना में मेड इन इंडिया सामग्री और उपकरणों, स्वदेशी तकनीक तथा भारतीय विशेषज्ञता और कौशल के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की मेक इन इंडिया पहल को भी मजबूती मिलेगी। आठ नए कॉर्वेट युद्धपोतों का निर्माण भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ देश के स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।