हाइलाइट्स
• JNU से बर्खास्तगी पर अकोइजाम ने BJP पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया
• जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अदालत जाने की बात कही
• यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस की जांच जारी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से बर्खास्त किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे ‘विच हंट’ यानी चुन-चुनकर निशाना बनाने की मुहिम बताते हुए आरोप लगाया कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के मुद्दों पर उनकी आवाज दबाने के लिए राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की गई है। अकोइजाम ने जांच प्रक्रिया में खामियों का दावा करते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं मिला। उन्होंने इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की बात भी कही है।
जांच और बर्खास्तगी की समय-सीमा पर उठाए सवाल
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अकोइजाम ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया। उनके मुताबिक, दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर उन्हें ईमेल के जरिए बताया गया कि जांच बंद कर दी गई है। इसके करीब एक घंटे के भीतर रिपोर्ट तैयार करके कुलपति को सौंप दी गई, लेकिन उन्हें रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली।
अकोइजाम का दावा है कि इसके कुछ ही समय बाद बर्खास्तगी का आदेश जारी हो गया और दोपहर ढाई बजे तक मामला मीडिया में लीक हो गया। उन्होंने कुलपति के कथित बयान का हवाला देते हुए सवाल किया कि जब रिपोर्ट खुद उन्होंने पढ़ी तक नहीं थी, तो इतनी जल्दी बर्खास्तगी का आदेश कैसे जारी हो गया। अकोइजाम के अनुसार, शुरुआत से ही इस प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं।
अकादमिक शिकायत से पॉश एक्ट तक मामला पहुंचने पर सवाल
अकोइजाम ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि मूल शिकायत विभाग में अकादमिक मामलों और पढ़ाने के तरीके से जुड़ी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यह मामला यौन उत्पीड़न और महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून (पॉश एक्ट) के तहत कैसे पहुंच गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मीडिया में सामने आए ‘अंकों के बदले यौन संबंध’ जैसे आरोप मूल शिकायत में शामिल नहीं थे। अकोइजाम ने शिकायत से जुड़े 97 छात्रों और 15 हस्ताक्षरकर्ताओं का जिक्र किया। उनके मुताबिक, हस्ताक्षर करने वालों में तीन लड़के भी शामिल हैं। उन्होंने इन बातों के आधार पर शिकायत की प्रकृति और पॉश कानून के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। ये दावे अकोइजाम की ओर से किए गए हैं।
ईमेल और गवाहों को लेकर क्या बोले अकोइजाम?
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप को भी अकोइजाम ने गलत बताया। उन्होंने कहा कि कुलपति की ओर से मीडिया में 300 ईमेल भेजे जाने की बात कही जा रही है, जबकि उनके रिकॉर्ड में सिर्फ 43 या 44 ईमेल मिलने की बात सामने आएगी।
अकोइजाम के मुताबिक, उन्होंने 31 मई को लिखित जवाब दिया था और 16 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि 14 अगस्त को उनके आठ गवाह जांच पैनल के सामने पेश हुए थे।
अकोइजाम ने कहा कि वह अदालत में सभी रिकॉर्ड रखेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप कितना सही है।
भाजपा पर लगाया पूर्वोत्तर की आवाज दबाने का आरोप
अकोइजाम ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने और क्षेत्रीय मुद्दे उठाने वाले पूर्वोत्तर के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि भाजपा चाहती है कि मणिपुर और पूर्वोत्तर के लोग चुप रहें और सत्ता के सामने झुककर रहें।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, 'मैं चुप रहने वालों में से नहीं हूं। वे मुझे खामोश करने में कामयाब नहीं होंगे। मणिपुर और पूर्वोत्तर से हजारों बिमोल उठ खड़े होंगे।”
अकोइजाम ने दोहराया कि वह इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे और कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखेंगे।
अक्टूबर 2026 को JNU ने किया था बर्खास्त
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर 2026 को अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाने का आदेश जारी किया था। विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक, आंतरिक समिति ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
अकोइजाम विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में कार्यरत थे। उन पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
दिल्ली पुलिस ने भी दर्ज की FIR
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। दूसरी ओर, अकोइजाम विश्वविद्यालय की बर्खास्तगी और जांच प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की बात कह चुके हैं।