Narendra Modi Birthday Special: न्यूज कोरिडोर के साथ विशेष बातचीत में अरविंद चतुर्वेदी ने नरेंद्र मोदी के पारिवारिक जीवन, बचपन, मां हीराबेन, RSS से जुड़ाव और उनके व्यक्तित्व से जुड़े कई अनसुने प्रसंग साझा किए।
सवाल: नरेंद्र मोदी पर किताब लिखने का विचार आपके मन में कैसे आया?
उत्तर: साल 2013 में मैं एक बड़े न्यूज चैनल में काम कर रहा था। वहां करीब दस साल का समय बिताने के बाद एक दिन अचानक मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा गया। इस घटना से मुझे काफी धक्का लगा। करीब छह महीने तक मेरे पास नौकरी नहीं थी।
इसी दौरान मैंने तय किया कि अब ऐसा काम करना चाहिए, जिससे मुझे वास्तविक संतुष्टि और पहचान मिले। तब मेरे मन में नरेंद्र मोदी पर एक ऐसी किताब लिखने का विचार आया, जो उनके बारे में पहले से मौजूद किताबों से अलग हो।
मुझे लगा कि मोदी के बारे में लिखी गई किताबों में उनके मानवीय पक्ष पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई है। उनके परिवार, दोस्तों, बचपन के शिक्षकों और उनके साथ काम करने वाले लोगों को बहुत कम लोग जानते थे।
मैंने सोचा कि प्रधानमंत्री के उस पक्ष को सामने लाना चाहिए, जिसे देश और दुनिया बहुत कम जानती है।
सवाल: इस विचार को किताब में बदलने के लिए आपने किस तरह की रिसर्च की?
उत्तर: इसके लिए मैं गुजरात गया और कई जगहों पर यात्रा की। मैंने उन लोगों से मुलाकात की, जो नरेंद्र मोदी के जीवन के अलग-अलग दौरों से जुड़े रहे थे।
मैंने उनके बचपन के दोस्तों, शिक्षकों, परिवार के सदस्यों और RSS से जुड़े लोगों से बातचीत की। इनमें कई ऐसे लोग थे, जिन्होंने पहले कभी पत्रकारों से खुलकर बात नहीं की थी।
मैंने उनके जीवन के उन हिस्सों को समझने की कोशिश की, जो राजनीति में आने से पहले के थे। इसी दौरान मुझे उनके परिवार और बचपन से जुड़ी कई बातें पता चलीं।
मेरी पहली किताब The Real Modi: The Man Who Would Be Prime Minister थी। इसे लिखना सबसे मुश्किल रहा, क्योंकि उस समय बहुत कम लोग उनके परिवार और निजी जीवन के बारे में बात करने को तैयार थे।
सवाल: आपकी तीनों किताबों में क्या अंतर है?
उत्तर: तीनों किताबों का अपना अलग विषय है।
पहली किताब The Real Modi में मैंने नरेंद्र मोदी के जीवन के उन पहलुओं को समझने की कोशिश की, जो उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले के थे। इसमें उनके परिवार, दोस्तों, शिक्षकों और RSS से जुड़े लोगों की बातें शामिल हैं।
दूसरी किताब Modi Ka Banaras वाराणसी और नरेंद्र मोदी के बीच के संबंध पर केंद्रित है। इसमें काशी और उस क्षेत्र के राजनीतिक-सामाजिक महत्व पर चर्चा की गई है।
तीसरी किताब Maa Heeraben Aur Narendra: Ek Unkahi Kahani उनकी मां हीराबेन और नरेंद्र मोदी के संबंधों पर केंद्रित है। यह किताब उनके पारिवारिक जीवन और मां-बेटे के रिश्ते से जुड़े प्रसंगों को सामने लाती है।
सवाल: नरेंद्र मोदी के बचपन और परिवार से जुड़ा कोई ऐसा प्रसंग, जो लोगों को कम पता हो?
उत्तर: नरेंद्र मोदी के बचपन से जुड़े कई प्रसंग हैं। उनकी मां हीराबेन का जीवन बहुत अनुशासित था। वह सुबह जल्दी उठती थीं, पूजा करती थीं और दिनचर्या को व्यवस्थित रखती थीं।
गांव में लोग उनके पास घरेलू उपचार और पारंपरिक इलाज से जुड़ी सलाह लेने भी आते थे। मैंने अपनी किताब में इस बारे में विस्तार से लिखा है।
हीराबेन के जीवन में सादगी और अनुशासन का विशेष महत्व था। परिवार की परिस्थितियां भी हमेशा आसान नहीं थीं। नरेंद्र मोदी के पिता दामोदरदास मोदी ने अलग-अलग काम किए। उन्होंने पहले नमक की मिल में काम करने की कोशिश की और बाद में चाय की दुकान भी चलायी।
चाय की उस दुकान से जुड़ी कहानी भी उनके जीवन का एक दिलचस्प हिस्सा है।
सवाल: नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन उनके भविष्य को लेकर किस तरह सोचती थीं?
उत्तर: हर मां की तरह हीराबेन भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं। जब कोई ज्योतिषी वडनगर आता था, तो वह अपने बच्चों की कुंडली दिखाकर उनके भविष्य के बारे में जानने की कोशिश करती थीं।
एक बार उन्होंने नरेंद्र मोदी की कुंडली भी एक ज्योतिषी को दिखाई। उस ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की कि नरेंद्र मोदी या तो एक महान संत बनेंगे या फिर राजा।
ज्योतिषी का नाम ज्ञात नहीं है, लेकिन यह प्रसंग नरेंद्र मोदी के बचपन और परिवार से जुड़ी उन कहानियों में शामिल है, जिनका उल्लेख मैंने अपनी किताब में किया है।
सवाल: नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को लेकर हीराबेन की क्या परंपरा थी?
उत्तर: बचपन में नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनकी मां गरीबों को दान देती थीं और साधु-संतों को भोजन कराती थीं।
हालांकि, यह कहने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि नरेंद्र मोदी का जन्मदिन बचपन में किसी औपचारिक समारोह के रूप में मनाया जाता था।
इस प्रसंग से उनके परिवार की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं की झलक मिलती है।
सवाल: मां हीराबेन और नरेंद्र मोदी के रिश्ते को आप किस तरह देखते हैं?
उत्तर: हीराबेन नरेंद्र मोदी की ताकत थीं। वह सहज रूप से समझती थीं कि उनके बेटे को किस तरह के सहयोग की जरूरत है।
इसका एक उदाहरण तब सामने आया, जब नरेंद्र मोदी ने छह दिनों तक दिन में केवल एक बार भोजन करने का उपवास रखने का फैसला किया। हीराबेन ने घर के अधिकतर लोगों से भी उन छह दिनों में उसी दिनचर्या का पालन करने को कहा, ताकि वे उनके बेटे के साथ एकजुटता दिखा सकें।
एक और महत्वपूर्ण प्रसंग नरेंद्र मोदी के युवावस्था का है। जब उन्होंने हिमालय जाने की इच्छा जताई, तो परिवार के बाकी लोग इसके पक्ष में नहीं थे। लेकिन उनकी मां ने उनका साथ दिया। अंततः उनके पिता भी उन्हें जाने देने के लिए तैयार हो गए।
इस पूरे प्रसंग में हीराबेन का समर्थन महत्वपूर्ण था।
सवाल: क्या हीराबेन की आदतों का असर नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में दिखाई देता है?
उत्तर: हीराबेन बहुत अनुशासित थीं। उनकी दिनचर्या निश्चित थी और वह अपने काम व्यवस्थित तरीके से करती थीं।
मेरे विचार से नरेंद्र मोदी में भी अनुशासन एक प्रमुख गुण के रूप में दिखाई देता है। उनसे बातचीत करते समय मैंने महसूस किया कि वह लंबे समय तक किसी की बात ध्यान से सुन सकते हैं।
उनमें अपने निर्णय पर भरोसा रखने की क्षमता भी है। एक बार निर्णय लेने के बाद वह उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। ये बातें मैंने उनके बारे में अपने अनुभवों और बातचीत के आधार पर देखी हैं।
सवाल: नरेंद्र मोदी के स्कूली जीवन के बारे में आपने क्या जाना?
उत्तर: उनके स्कूली जीवन से जुड़ी कई कहानियां हैं। नरेंद्र मोदी क्रिकेट खेलते थे और स्कूल के दिनों में उनकी अपनी क्रिकेट टीम भी थी। वह अच्छे क्रिकेट खिलाड़ी थे।
एक दिलचस्प बात यह है कि वह खुद कभी क्लास मॉनिटर के लिए खड़े नहीं हुए, लेकिन अपने दोस्तों को उस पद पर चुनाव जिताने में मदद करते थे। उनके एक दोस्त, जिन्हें उन्होंने मॉनिटर बनवाया था, बाद में बैंक मैनेजर बने।
मॉनिटर का पद उस समय महत्वपूर्ण माना जाता था, क्योंकि वह प्रिंसिपल के साथ संपर्क में रहता था।
सवाल: क्या उनके स्कूल के दिनों में नेतृत्व क्षमता की कोई और मिसाल मिलती है?
उत्तर: हां, एक प्रसंग उनके स्कूल के हेड टीचर रासबिहारी मनियार से जुड़ा है। वह गणित पढ़ाते थे और जब उनका तबादला हुआ, तो नरेंद्र मोदी ने अपने दोस्तों को साथ लेकर उनके लिए विदाई समारोह आयोजित किया।
यह एक तरह से स्कूल के भीतर किया गया छोटा-सा सामूहिक प्रयास था। जब रासबिहारी मनियार स्कूल से विदा हुए, तो पूरा स्कूल उन्हें स्टेशन तक छोड़ने गया।
इससे पता चलता है कि नरेंद्र मोदी अपने साथियों को साथ लेकर काम करने में रुचि रखते थे।
सवाल: स्कूल की दीवार से जुड़ी कहानी क्या है?
उत्तर: नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन ने एक प्रसंग साझा किया था। उनके स्कूल की एक दीवार गिर गई थी। उसे दोबारा बनवाने के लिए एक स्मारिका प्रकाशित की गई, रसीदें जारी की गईं और लोगों से चंदा इकट्ठा किया गया।
इसी तरह दीवार का पुनर्निर्माण कराया गया।
इस कहानी में यह बात सामने आती है कि नरेंद्र मोदी ने बहुत कम उम्र में सामूहिक प्रयास और मिलकर काम करने के महत्व को समझा था।
सवाल: वाराणसी पर किताब लिखने का अनुभव कैसा रहा?
उत्तर: Modi Ka Banaras लिखते समय मैंने वाराणसी और उसके आसपास के क्षेत्र को समझने की कोशिश की।
2014 में नरेंद्र मोदी के लोकसभा चुनाव क्षेत्र को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। कुछ लोग लखनऊ, कुछ महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और गुजरात की सीटों की बात कर रहे थे।
लेकिन जब वाराणसी का चुनाव क्षेत्र तय हुआ, तो इसका संबंध पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और झारखंड तक फैले एक बड़े क्षेत्र से जुड़ गया।
वाराणसी यानी काशी से भारत के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव है। यह एक ऐसा शहर है, जिसके बारे में धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। इसलिए इस क्षेत्र का राजनीतिक और सामाजिक महत्व समझना जरूरी था।
सवाल: क्या नरेंद्र मोदी से जुड़ा कोई ऐसा अनुभव है, जिसने आपको प्रभावित किया?
उत्तर: साल 2013 में मैं दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC में नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम को कवर करने गया था।
उन्होंने गुजरात के विकास और आशा बनाम निराशा पर भाषण दिया। लेकिन मेरे लिए उनकी स्पीच के बाद की एक घटना अधिक दिलचस्प थी।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी आमंत्रित किया गया था। जब हमने कॉलेज के प्रिंसिपल से पूछा कि वे कार्यक्रम में क्यों नहीं आए, तो उन्होंने बताया कि सभी को डाक और ईमेल से निमंत्रण भेजे गए थे।
कुछ जवाब दस दिन बाद आए और कुछ पंद्रह दिन बाद। लेकिन नरेंद्र मोदी के कार्यालय से जवाब केवल पंद्रह मिनट में आ गया था।
उस समय राजनीतिक माहौल काफी गर्म था। ऐसे में इतनी तेजी से जवाब देना मेरे लिए एक दिलचस्प अनुभव था। इससे मुझे उनके काम करने के तरीके और निर्णय लेने की शैली को करीब से देखने का अवसर मिला।
सवाल: RSS से जुड़े उनके जीवन के बारे में आपने क्या जाना?
उत्तर: नरेंद्र मोदी का RSS से जुड़ाव उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। जब वह RSS की शाखा में रहने लगे, तो शुरुआत में उन्हें कई तरह के काम करने पड़ते थे।
इन कामों में चाय बनाना, सफाई करना और बाहर से आने वाले संघ के कार्यकर्ताओं के लिए ट्रेन की टिकट बुक करना शामिल था।
यह कोई आसान जीवन नहीं था। लेकिन उन्होंने उन जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाया।
उनके जीवन पर RSS के एक वरिष्ठ व्यक्ति लक्ष्मणराव इनामदार का गहरा प्रभाव था। उन्हें लोग 'वकील साहब' के नाम से जानते थे।
सवाल: लक्ष्मणराव इनामदार से नरेंद्र मोदी का संबंध कैसे बना?
उत्तर: नरेंद्र मोदी की मुलाकात वकील साहब से आठ वर्ष की उम्र में हुई थी। लक्ष्मणराव इनामदार महाराष्ट्र के पुणे से थे। वह बहुत विद्वान और अनुशासित व्यक्ति थे।
जब भी नरेंद्र मोदी किसी मुश्किल में होते, तो वह उनसे मार्गदर्शन लेते थे। नरेंद्र मोदी ने उनके जीवन और प्रभाव के बारे में अपनी किताब Jyotipunj में भी लिखा है।
वकील साहब का नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा।
सवाल: क्या नरेंद्र मोदी के बचपन से जुड़ी कोई और कहानी है, जो आपको खास लगती है?
उत्तर: एक कहानी नरेंद्र मोदी ने खुद मुझे सुनाई थी। यह उनके बचपन की है और मैंने इसे अपनी तीसरी किताब में भी शामिल किया है।
एक बार वह वडनगर से विसनगर जा रहे थे। ट्रेन में उन्होंने एक दिव्यांग लड़के को देखा, जिसके पास एक बैग और अखबार था। यात्रियों के ट्रेन में चढ़ने पर वह लड़का उन्हें अखबार पढ़ने के लिए देता था और जूते पॉलिश करने की पेशकश भी करता था।
उस लड़के के काम करने का तरीका अलग था। वह जिस तरह अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था, उसने नरेंद्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया।
यह एक पुरानी घटना है, लेकिन नरेंद्र मोदी को वह कहानी आज भी याद थी। जब उन्होंने मुझे यह प्रसंग सुनाया, तो मुझे लगा कि बचपन की कुछ घटनाएं व्यक्ति के मन में लंबे समय तक बनी रहती हैं।
सवाल: नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में आपको कौन-सी बात सबसे ज्यादा दिखाई देती है?
उत्तर: मेरे अनुभव में नरेंद्र मोदी किसी भी काम को जिम्मेदारी के साथ करने की कोशिश करते हैं।
चाहे वह स्कूल का कोई सामूहिक कार्य हो, RSS से जुड़ी जिम्मेदारी हो या फिर कोई अन्य काम—उनके बारे में मुझे जो कहानियां मिलीं, उनमें जिम्मेदारी और काम को पूरा करने की भावना दिखाई देती है।
उनमें यह भी विशेषता है कि वह छोटी-बड़ी हर चीज से कुछ सीखने की कोशिश करते हैं।
सवाल: क्या नरेंद्र मोदी की रुचियां राजनीति से बाहर भी रही हैं?
उत्तर: हां, वह फिल्मों में भी रुचि रखते थे। वह अपने से काफी छोटे लोगों के साथ फिल्में देखने जाते थे।
उनके अपने ऐप पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने देव आनंद की फिल्म Guide का उल्लेख किया है और उससे एक दार्शनिक अर्थ ग्रहण किया।
मैंने गुजरात में किसी व्यक्ति के पास अभिनेता मनोज कुमार के साथ नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर भी देखी थी। नरेंद्र मोदी ने स्वयं लता मंगेशकर को अपनी बड़ी बहन जैसा बताया है और उनके प्रति स्नेह व्यक्त किया है।
सवाल: आपकी नजर में नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा को समझने के लिए क्या महत्वपूर्ण है?
उत्तर: उनके जीवन को समझने के लिए उनके परिवार, बचपन, दोस्तों, शिक्षकों और RSS से जुड़े लोगों की बातों को जानना जरूरी है।
इसीलिए मैंने अपनी किताबों में उन लोगों की कहानियों को शामिल किया, जिन्होंने उनके जीवन के अलग-अलग दौर देखे थे।
मेरी कोशिश रही है कि पाठकों को नरेंद्र मोदी के जीवन के उन पहलुओं के बारे में जानकारी मिले, जो आम राजनीतिक चर्चा में अक्सर सामने नहीं आते।
(अरविंद चतुर्वेदी के बारे में: काशी की मिट्टी से जुड़े पत्रकार हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र की पढ़ाई की और बाद में टेलीविजन पत्रकारिता में आए। संप्रति तहलका पत्रिका के संपादक हैं।)
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न्यूज कोरिडोर का संपादकीय नोट: यह बातचीत पत्रकार अरविंद चतुर्वेदी के साथ हुई चर्चा के आधार पर प्रस्तुत की गई है। इसमें उनके द्वारा साझा किए गए प्रसंगों और उनके अनुभवों को कहानीनुमा सवाल-जवाब के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।