NEET-UG में दो चरणों में हो सकती है परीक्षा, संसदीय समिति ने दिया सुझाव

NEET-UG में दो चरणों में हो सकती है परीक्षा, संसदीय समिति ने दिया सुझाव
  • NEET-UG को दो चरणों में कराने की व्यवहार्यता जांचेगा NTA
  • पहले चरण में सभी मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए हो सकती है सामान्य परीक्षा
  • दो से पांच मिनट देर से पहुंचने वाले छात्रों को राहत देने का सुझाव
  • परीक्षा सुरक्षा के ऑडिट और शिकायतों की स्वतंत्र जांच की सिफारिश

NEET UG Two Stage Exam: नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है। राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर नीट-यूजी दो चरणों में कराने की व्यवहार्यता जांचने का सुझाव दिया है।

इस बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एनटीए की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की कमी और परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

पहले सामान्य परीक्षा, फिर पाठ्यक्रम के अनुसार चयन

समिति के सुझाव के मुताबिक, सभी मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए पहले एक सामान्य प्रारंभिक परीक्षा और उसके बाद एमबीबीएस, नर्सिंग तथा आयुष जैसे पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग मुख्य परीक्षाओं की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी सुझाव है, अंतिम निर्णय नहीं।

समिति ने परीक्षा प्रक्रिया में अन्य सुधारों की भी सिफारिश की है। इनमें नीट-यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलना, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की परीक्षा समाप्त होने तक कड़ी निगरानी और सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्रों का विस्तार शामिल है।

फिलहाल इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) दो स्तरों पर आयोजित की जाती है। इसमें जेईई मेन और जेईई एडवांस शामिल हैं। हालांकि, नीट-यूजी में दो चरण लागू करने से अभ्यर्थियों को अतिरिक्त परीक्षा देनी पड़ सकती है। इसलिए इस बदलाव के व्यावहारिक पहलुओं का आकलन जरूरी होगा।

परीक्षा में देरी पर भी राहत की सिफारिश

समिति ने परीक्षा केंद्र पर उचित कारणों से दो से पांच मिनट देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को सीधे बाहर करने के बजाय राहत देने पर विचार करने को कहा है। ऐसे छात्रों को शेष समय में परीक्षा देने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए उनसे पहले वचनपत्र लेने का सुझाव दिया गया है। समिति का कहना है कि मामूली देरी के कारण किसी अभ्यर्थी का पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद नहीं होना चाहिए।

NTA में 41 प्रतिशत पद खाली होने का मुद्दा

जयराम रमेश ने 11 अक्टूबर को संसदीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनटीए की संरचना पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, एजेंसी में 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 पर अधिकारी तैनात हैं। यानी करीब 41 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण परीक्षा आयोजन के लिए निजी ठेकेदारों पर निर्भरता बढ़ती है।

रमेश ने यह भी कहा कि एनटीए सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत है, न कि संसद के कानून से गठित वैधानिक निकाय के रूप में। उनके अनुसार, इससे एजेंसी की जवाबदेही और संसदीय निगरानी को लेकर सवाल पैदा होते हैं।

पेपर लीक और पारदर्शिता पर सवाल

जयराम रमेश ने दावा किया कि एनटीए की परीक्षाओं में 2017 से 2025 के बीच नौ पेपर लीक या अनियमितताओं के मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्रालय ने समिति के सामने इस अवधि में एनटीए की परीक्षाओं में पेपर लीक नहीं होने की बात कही थी। यह मंत्रालय के रुख और कांग्रेस नेता के दावे के बीच मतभेद को दर्शाता है।

उन्होंने परीक्षा से जुड़ी सेवाएं देने वाली कंपनियों की देशव्यापी ब्लैकलिस्ट बनाने और नीट-यूजी के केंद्रवार परिणाम सार्वजनिक करने की जरूरत भी उठाई।

590 करोड़ रुपये के अधिशेष पर चर्चा

रमेश के अनुसार, एनटीए ने वित्त वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच 590 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष अर्जित किया, जिसे सावधि जमा में रखा गया। दूसरी ओर, संसदीय समिति ने इस राशि का इस्तेमाल सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्रों के विकास और मॉक टेस्ट की सुविधा बढ़ाने में करने का सुझाव दिया है।