Nepal Floods: नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ और भूस्खलन के बाद मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रविवार सुबह 11 बजे तक 735 शव बरामद किए जा चुके थे, लेकिन इनमें सिर्फ 20 की पहचान हो पाई थी। कई शव नदी के तेज बहाव में बहकर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच गए।
चितवन में अकेले 264 शव बरामद हुए, जिनमें सिर्फ चार की पहचान हो सकी। शवों की बढ़ती संख्या और उनके खराब होने के कारण प्रशासन ने अज्ञात शवों को एयरटाइट बैग में रखकर दफनाने का फैसला किया है।
क्या अज्ञात शवों को दफनाना सही है?
अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइंस के मुताबिक, अज्ञात शवों को अस्थायी तौर पर दफनाया जा सकता है, लेकिन उनकी पहचान से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है। ICRC, WHO और IFRC की गाइडलाइंस में शवों की पहचान और भविष्य में उन्हें परिवार को सौंपने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
हर शव को अलग पहचान नंबर देना, वाटरप्रूफ टैग लगाना, फोटो और निजी सामान का रिकॉर्ड रखना तथा DNA या अन्य फोरेंसिक नमूने सुरक्षित रखना जरूरी है। दफन स्थल की सटीक लोकेशन और GPS रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण है।
क्या शवों को तुरंत दफनाना जरूरी था?
WHO के मुताबिक, सिर्फ महामारी के डर से शवों को जल्दबाजी में सामूहिक रूप से दफनाना जरूरी नहीं है। पहले शव की तस्वीर, कपड़े, निजी सामान और पहचान से जुड़ी जानकारी दर्ज की जानी चाहिए।
नेपाल पुलिस के अनुसार, बरामद शवों से DNA सैंपल लिए जा रहे हैं और उन्हें नंबर टैग दिए जा रहे हैं। बाद में पहचान होने पर शव को कब्र से निकालकर परिवार को सौंपा जा सकता है।
बाढ़ में पहचान क्यों मुश्किल?
भारी बाढ़ में शव कई किलोमीटर तक बह सकते हैं और पानी-कीचड़ में रहने से क्षत-विक्षत हो जाते हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, 211 शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं। ऐसे मामलों में चेहरे से पहचान मुश्किल होती है, इसलिए DNA, फिंगरप्रिंट और दांतों के रिकॉर्ड अहम हो जाते हैं।
बता दें कि अज्ञात शवों को दफनाना अपने आप में अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि हर शव की पहचान और दफन स्थल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में परिवार अपने लापता परिजन की पहचान कर सकें और शव वापस पा सकें।