प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” के विमोजन के मौके पर अपनी मां को याद किया।
प्रदानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आत्मकथा अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी।
मां की कमी
मोदी ने पुस्तक के हवाले से पूर्व राष्ट्रपति के बचपन में घर में आग लगने से उनकी माता की मृत्यु होने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।’
कोविंद की विनम्रता
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कोविंद की विनम्रता का जिक्र करते हुए कहा, ‘ मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं।’
ऐसे युवा चाहिए
उन्होंने कहा. ‘हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।’
एक देश एक चुनाव
प्रधानमंत्री के कहा कि पूर्व राष्ट्रपति अब भी सक्रिय हैं और ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है।’
युवा पीढ़ी से आग्रह
मोदी ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा, ‘रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ‘