PM Modi Foreign Visits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों को लेकर भारत में अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक आर्टिकल में इन यात्राओं के आर्थिक और कूटनीतिक असर का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलते समीकरणों के बीच भारत ने अपनी विदेश नीति में अधिक व्यावहारिक और बहुपक्षीय रुख अपनाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाए जाने और रूसी तेल खरीद को लेकर दबाव के बाद भारत की कूटनीति में बदलाव दिखाई दिया है। अमेरिका के साथ रिश्तों में आई खटास और ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच भारत अलग-अलग देशों के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंध बढ़ा रहा है।
20 देशों के दौरे और 13 देशों के नेताओं की भारत यात्रा
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम से कम 20 देशों की आधिकारिक यात्राएं कर चुके हैं। वहीं 13 देशों के शीर्ष नेता भारत का दौरा कर चुके हैं।
इन यात्राओं में पारंपरिक मेल-मिलाप के साथ व्यापार और ठोस समझौतों पर भी जोर रहा है। पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरा भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया गया है। SCO शिखर सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ऊर्जा-रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होगी।
भारत को इन दौरों के जरिए रक्षा तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, व्यापार और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में समझौतों और सहयोग का लाभ मिला है।
यूरोप से लेकर एशिया तक समझौतों पर जोर
जर्मनी के साथ पनडुब्बी तकनीक, फ्रांस के साथ एआई, सुशासन और छात्रों के लिए वीजा समझौते तथा यूनाइटेड किंगडम के साथ स्कॉच व्हिस्की पर सस्ते आयात शुल्क जैसे समझौतों का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है।
इसके अलावा यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय कारों और वाइन पर अपने टैरिफ में कटौती जैसी आर्थिक रियायतें दी हैं।
रक्षा, ऊर्जा और AI बनीं भारत की प्राथमिकताएं
रिपोर्ट के अनुसार भारत की नई कूटनीतिक रणनीति में रक्षा तकनीक, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आयात, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और युवाओं के लिए विदेशों में पढ़ाई व रोजगार के अवसर प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
नॉर्वे के साथ रोजगार सृजन समझौता और दक्षिण कोरिया के साथ जहाज निर्माण में सहयोग बढ़ाने के वादे भी इसी रणनीति से जुड़े हैं।
भारत का लक्ष्य 2047 तक दुनिया के टॉप 5 शिप बिल्डर्स में शामिल होना है। वहीं न्यूजीलैंड के साथ 40 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर जोर दिया गया।
अमेरिका के साथ रिश्तों पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते फिलहाल अस्थिरता के दौर में हैं। चैथम हाउस के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ चीतिग्ज बाजपेयी के मुताबिक, जी-7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की हालिया मुलाकात औपचारिक रही और उसमें रणनीतिक गहराई का अभाव था।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए भारत फ्रांस, जापान और कनाडा जैसी मध्यम शक्तियों और ग्लोबल पावर्स के बीच संतुलन साधने की अपनी पुरानी नीति की ओर लौट रहा है।
सरकारी समझौतों से आगे आर्थिक ताकत पर फोकस
पीएम मोदी की इस आर्थिक कूटनीति को केवल सरकारी समझौतों तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। रिपोर्ट में इसे भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की कोशिश से जोड़कर देखा गया है।
फ्रांस के साथ एआई पर सहयोग से लेकर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ दोस्ताना अंदाज तक, भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बदलते वैश्विक दबावों के बीच भारत अपने पारंपरिक संरक्षणवाद से आगे बढ़कर वैश्विक साझेदारियों पर जोर दे रहा है। इस बदलाव के पीछे अमेरिका की भारत पर दबाव डालने वाली नीति को भी एक अहम कारण के तौर पर देखा गया है।