- साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए वैश्विक समन्वित व्यवस्था की जरूरत
- डीपफेक के बढ़ते खतरे से निपटने पर जोर
- सरकारों और टेक कंपनियों से मिलकर काम करने की अपील
- भारत अपने साइबर सुरक्षा अनुभव दुनिया से साझा करने को तैयार
- 5G नेटवर्क और डिजिटल शासन की उपलब्धियां भी गिनाईं
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Modi On Cyber Fraud and Deepfake: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साइबर धोखाधड़ी और ‘डीपफेक’ के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एक समन्वित व्यवस्था बनाने का बृहस्पतिवार को आह्वान किया।
उन्होंने यह बात नई दिल्ली में सात से 10 अक्टूबर तक आयोजित ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ IMC के 10वें संस्करण के उद्घाटन के मौके पर कही। उन्होंने ऐसी धोखाधड़ी लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोकने के लिए सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
भारत को काफी अनुभव
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने में काफी अनुभव हासिल किया है और वह अपने अनुभव दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी और साइबर अपराध किसी भी देश की सीमा से परे हैं तथा प्रौद्योगिकी का विस्तार तभी होता है जब उस पर भरोसा कायम होता है।
‘डीपफेक’ से निपटने को परस्पर सहयोग जरूरी
मोदी ने ‘डीपफेक’ से पैदा हो रही चुनौती को भी रेखांकित किया और कहा कि ऐसे उभरते खतरों से निपटने के लिए देशों को वैश्विक ढांचे पर मिलकर काम करने की जरूरत है। सरकारों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, दूरसंचार कंपनियों और वित्तीय संस्थानों-सभी को इस ढांचे से जुड़ना होगा।
मोदी ने कहा कि अब 5जी सेवाएं हर जिले तक पहुंच गई है। 5जी नेटवर्क के लिए पांच लाख 50 हजार से अधिक ‘बेस स्टेशन’ काम कर रहे हैं और 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति 10 गुना बढ़ गई है।
पांच लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचाए
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल शासन को बढ़ावा देने से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मदद मिली है और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए करीब पांच लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए हैं। मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिये करीब 50 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं।
आगे क्या-क्या
वर्ष 2026 के संस्करण के प्रमुख क्षेत्रों में 5जी व 6जी, अगली पीढ़ी के एआई नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, उद्यम बदलाव, संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने वाली अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, सामाजिक व शासन (ईएसजी) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं ।