SIR विवाद पर विपक्ष की बैठक, राहुल गांधी के घर जुटे इंडिया ब्लॉक के नेता

SIR विवाद पर विपक्ष की बैठक, राहुल गांधी के घर जुटे इंडिया ब्लॉक के नेता
हाइलाइट्स
• SIR के खिलाफ राहुल गांधी के आवास पर जुटे INDIA ब्लॉक के नेता
• ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
• सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने विपक्ष की याचिका में बताईं 14 खामियां

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। इंडिया ब्लॉक के 'चलो दिल्ली' मार्च के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के नेताओं, सांसदों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों को अपने आवास पर चाय पर बैठक के लिए आमंत्रित किया। राहुल गांधी के घर पर विपक्षी नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया और बैठक भी शुरू हो गई।

बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सीपीआईएम सांसद जॉन ब्रिटास और पवन खेड़ा समेत कई नेता पहुंचे। इस दौरान एसआईआर के खिलाफ जारी आंदोलन और विपक्ष की आगे की भूमिका को लेकर चर्चा का संदर्भ सामने आया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की बात

बैठक से पहले विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के मुद्दे पर उनका विरोध जारी रहेगा। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।"

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "लोकतंत्र खतरे में है। सरकार और चुनाव आयोग लोगों से उनके वोट का अधिकार छीनने पर आमादा हैं। इसी वजह से यहां लगातार संघर्ष चल रहा है और यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।"

समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने बताया कि राहुल गांधी के निमंत्रण पर वे बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, "यह जनता से जुड़ा मुद्दा है और हम इसी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हम यह लड़ाई जनता के लिए लड़ रहे हैं। जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते और चुनाव आयोग की व्यवस्था में बदलाव नहीं होता, तब तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।"

राहुल गांधी ने भी बैठक को लेकर एक्स पर कहा था, ''चाय के बाद हम सभी एक साथ मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे। सभी प्रदर्शन एक ही आंदोलन का हिस्सा हैं।''

सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च के बाद विपक्ष की बैठक

सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था। इसके बाद विपक्ष के 11 नेताओं ने निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।

याचिका में एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से लिए गए फैसलों और उन्हें लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों और उनके क्रियान्वयन की जांच की मांग भी की है।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में बताईं 14 खामियां

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और इंडिया ब्लॉक के नौ अन्य नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 खामियां बताई हैं। यह याचिका मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से जुड़े कुछ पहलुओं को चुनौती देती है।

याचिका दाखिल करने वाले नेताओं में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत, माकपा सांसद एमए बेबी, भाकपा नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी, एनसीपी (एससीपी) की सांसद सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों पर भी मांगा स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों एसएस संधू तथा विवेक जोशी को याचिका में प्रतिवादी क्यों बनाया है। यह आपत्ति संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका के संदर्भ में उठाई गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अन्य राहतों के साथ मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े फैसले लेने और उन्हें लागू करने के तरीके की जांच की मांग की है।