हाइलाइट्स
• राहुल गांधी की SIR याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
• CJI सूर्यकांत बोले- कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता
• मतदाता सूची से नाम हटाने के नियमों पर विपक्ष ने उठाए सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने दायर की है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता। अदालत ने याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी सवाल उठाने की बात कही।
चुनाव आयोग और अधिकारियों से मांगा जवाब
राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है।
अदालत ने 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी आपत्ति जताई। CJI ने कहा, "हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।"
'कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता'
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और अन्य नेताओं के कथित SIR अनियमितताओं के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का उल्लेख हुआ। इस पर CJI ने कहा, "कोई भी न्यायपालिका को दबाव में नहीं डाल सकता।"
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने राजनीतिक जुलूस और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि करीब 200 वकीलों ने दबाव बनाने के इस तरह के प्रयास पर चिंता जताते हुए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ऐसी घटनाओं से अनजान नहीं है और वह 'हाथीदांत की मीनार' में बैठकर काम नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कमजोर प्रयासों पर कोई ध्यान नहीं देता और अदालत बाहर दिए जा रहे बयानों से भी अवगत है।
सुनवाई के दौरान असदुद्दीन ओवैसी सहित विभिन्न नेताओं की ओर से निर्वाचन आयोग से संबंधित दायर याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किए गए। अदालत ने समान राहत की मांग करने वाली याचिकाओं को एक साथ रखने का निर्देश दिया।
याचिका में कौन-कौन से नेता शामिल हैं?
इस याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत सहित अन्य नेता याचिकाकर्ता हैं।
याचिका 12 अक्तूबर को दायर की गई थी। शुरुआती प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 13 अक्टूबर को इसे पंजीकृत किया।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ताओं ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। वे चाहते हैं कि यह जांच हो कि चुनाव आयोग के फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून और 'टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप हैं या नहीं।
बिना नोटिस मतदाता का नाम न हटाने की मांग
याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस दिए और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए।
इसके अलावा, हटाए गए मतदाताओं की सूची बूथ-वार प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इस सूची में नाम हटाने के कारणों और संबंधित मतदाताओं के जनसांख्यिकीय विवरणों का भी उल्लेख होना चाहिए।