हाइलाइट्स
• कनॉट प्लेस में कारोबार बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
• रोजाना 200 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर की आशंका
• नुकसान गैर-कानूनी हुआ तो मुआवजे पर होगी कार्रवाई
दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा विरोध प्रदर्शन के कारण कारोबार बंद होने या प्रभावित होने की आशंका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को अदालत ने कहा कि यदि नई दिल्ली नगर निगम (NDMC) की ओर से लगाई गई पाबंदी जरूरत से ज्यादा अनुचित पाई जाती है और इससे कारोबार को गैर-कानूनी नुकसान होता है, तो वह मुआवजे के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले को दशहरा की छुट्टियों के बाद 26/27 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान कारोबार पर पड़ने वाले असर, छोटे दुकानदारों की आजीविका और मुआवजे के कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई।
रोजाना 200 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर की आशंका
वकील जय अनंत देहादराय ने अदालत में दिल्ली किराना कमिटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका का उल्लेख किया। याचिका में सेंट्रल पार्क में विरोध प्रदर्शन के आह्वान को लेकर चिंता जताई गई है।
वकील के अनुसार, प्रदर्शन के कारण रोजाना 200 करोड़ रुपये का कारोबार बाधित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि NDMC ने गुरुवार की रात नोटिस जारी कर संबंधित जगह को बंद करने का आदेश दिया था।
पीठ ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में पहले से ही इसी तरह के एक मामले की सुनवाई चल रही है। हालांकि, वकील ने दलील दी कि मौजूदा मामला अलग है।
इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा, 'यह अलग नहीं है। ये सब आपस में जुड़े हुए हैं। कोई विरोध प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है।ये सब एक-दूसरे से जुड़े हैं।'
छोटे दुकानदारों की आजीविका पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि त्योहारों का सीजन आने वाला है और इस समय जगह घिरने से कारोबार को भारी नुकसान हो सकता है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ने वाले असर का जिक्र किया। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे। हम जानते हैं कि छोटे दुकानदार इन्हीं दिनों में अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। हमें पता है कि पूरे परिवारों को किन मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।'
कारोबार को गैर-कानूनी नुकसान हुआ तो क्या होगा?
मुआवजे के सवाल पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यदि कारोबार को नुकसान होता है और अदालत यह पाती है कि संबंधित पक्षों के लिए यह गैर-कानूनी है, तो संवैधानिक टॉर्ट के अधिकार क्षेत्र के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा, 'अगर कारोबार का नुकसान होता है, और हम यह पाते हैं कि आपके क्लाइंट्स के लिए यह गैर-कानूनी है, तो हम 'कॉन्स्टिट्यूशनल टॉर्ट' अधिकार क्षेत्र के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे। जब वह स्थिति आएगी, तब उस पर विचार किया जाएगा।'
वकील ने दोबारा दलील दी कि NDMC के नोटिस से सेंट्रल दिल्ली का पूरा कारोबार बंद हो सकता है। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यदि निगम का आदेश जरूरत से ज्यादा सख्त पाबंदी पाया जाता है, तो अदालत मुआवजे और सार्वजनिक कानून के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेगी।
उन्होंने कहा, 'अगर हमें लगता है कि एनडीएमसी का आदेश जरूरत से ज्यादा सख्त पाबंदी है, तो जैसा कि हमने पहले ही कहा है, इस कोर्ट के पास मुआवजा और सार्वजनिक कानून के तहत काफी अधिकार क्षेत्र मौजूद है। हम कार्रवाई करेंगे।'
26/27 अक्तूबर को सूचीबद्ध हो सकता है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दशहरा की छुट्टियों के बाद 26/27 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। अदालत की टिप्पणियों के मुताबिक, आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि NDMC की पाबंदी अनुचित पाई जाती है या नहीं और कारोबार को हुए नुकसान की प्रकृति क्या है।