हाइलाइट्स:
• आईआईआईटी-दिल्ली में हुआ VYOMA इनोवेशन चैलेंज का फाइनल
• 10 टीमों ने स्वास्थ्य, कृषि और कानूनी सेवाओं के प्रोटोटाइप दिखाए
• आशा सहायक, श्रवण, संग्रह और सहायक मित्र टीमें विजेता चुनी गईं
• सुनो सूत्र के जरिए बहुभाषीय और ऑफलाइन एआई के इस्तेमाल पर जोर
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन ने करंट एआई और कल्पा इम्पैक्ट के सहयोग से आईआईआईटी-दिल्ली में VYOMA इनोवेशन चैलेंज का फाइनल आयोजित किया। इसमें शोधकर्ताओं, छात्रों और स्टार्टअप ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर के व्यावहारिक इस्तेमाल से जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।
चैलेंज में प्रतिभागियों को सुनो सूत्र पर आगे काम करने के लिए कहा गया था। यह भाषिनी और करंट एआई द्वारा विकसित ओपन-सोर्स, बहुभाषीय हैंडहेल्ड एआई रेफरेंस डिजाइन है। इसका उद्देश्य एआई हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को जनहित से जुड़े कार्यों तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करना था।
10 टीमों ने दिखाए प्रोटोटाइप
फाइनल में 10 फाइनलिस्ट टीमों ने अपने वर्किंग प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए। इनके इस्तेमाल के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच, कानूनी सेवाएं और विभिन्न सुविधाओं तक पहुंच शामिल रही। जूरी ने टीमों से उनके समाधानों को लेकर सवाल किए और फीडबैक दिया।
चुनौती ने ओपन-सोर्स एआई हार्डवेयर, बहुभाषीय एआई और एज एआई से जुड़े इकोसिस्टम को एक मंच पर लाया। प्रतिभागियों ने हार्डवेयर ऑप्टिमाइजेशन, मॉडल क्वांटाइजेशन, एक्यूरेसी और समाधानों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।
चार नवाचारों को मिला सम्मान
जूरी ने चार टीमों को विजेता चुना। इनमें आशा सहायक, श्रवण, संग्रह–अपना साथी और सहायक मित्र–A.V.E.R.A. (ऑटोनॉमस वॉयस-इनेबल्ड एज रूरल एडवाइजर) शामिल हैं। विजेता टीमों को उनके नवाचार और जनहित में इस्तेमाल की संभावनाओं के लिए पुरस्कार राशि दी गई।
मंत्रालय की वैज्ञानिक ‘जी’ कविता भाटिया ने कहा कि भारत अपनी जरूरतों के अनुरूप ओपन और जनहितकारी तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक की सफलता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि वह वास्तविक जीवन में नागरिकों के लिए कितनी उपयोगी साबित होती है।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा कि VYOMA की शुरुआत ऐसे ओपन और ऑफलाइन हार्डवेयर की जरूरत से हुई, जो विविध और सीमित कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में एआई को अधिक सुलभ बना सके। उन्होंने समाधान विकसित करने वाली टीमों के लिए आगे यूजर फीडबैक, सहयोग और निरंतर सुधार पर जोर दिया।
VYOMA चैलेंज का उद्देश्य ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर के इकोसिस्टम को बढ़ावा देना तथा भारत की भाषाई और तकनीकी विविधता के अनुरूप बहुभाषीय एवं एज एआई समाधान विकसित करना है।