कौन हैं गादी आइजेनकोट? नेतन्याहू के करीबी से बने सियासी प्रतिद्वंद्वी, युद्ध में खोया बेटा

कौन हैं गादी आइजेनकोट? नेतन्याहू के करीबी से बने सियासी प्रतिद्वंद्वी, युद्ध में खोया बेटा
हाइलाइट्स
• गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका मिला।
• कभी नेतन्याहू के करीबी रहे, अब बने सियासी प्रतिद्वंद्वी।
• दिसंबर 2023 में गाजा युद्ध में बेटे को खोया।

इजरायल की राजनीति में गादी आइजेनकोट का नाम इन दिनों चर्चा में है। सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं के बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट को नई सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। कभी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ काम कर चुके आइजेनकोट अब उनके प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं।

पूर्व सेना प्रमुख आइजेनकोट ने सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद कहा कि देश में अब राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी जनता की उम्मीदों पर खरी उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

कौन हैं गादी आइजेनकोट और कैसा रहा उनका शुरुआती जीवन?

गादी आइजेनकोट का जन्म 19 मई 1960 को इस्राइल के तिबेरियास में हुआ था। उनका परिवार मोरक्को से आए यहूदी प्रवासियों का था और आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि रखता था। आइजेनकोट का बचपन तिबेरियास और इलात में बीता।

66 वर्षीय आइजेनकोट नौ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं और उनके पांच बच्चे हैं। वह मिजराही समुदाय से आते हैं। इस्राइल में अब तक इस समुदाय से कोई प्रधानमंत्री नहीं बना है। ऐसे में अगर वह सरकार बनाने में सफल होते हैं, तो यह देश के इतिहास में पहली बार होगा।

राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपने जीवन के करीब चार दशक इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) में बिताए। उनका सैन्य सफर 1978 में गोलानी ब्रिगेड में भर्ती होने के साथ शुरू हुआ था।

सैनिक से सेना प्रमुख तक का सफर

आइजेनकोट ने सेना में एक सामान्य सैनिक के तौर पर शुरुआत की और धीरे-धीरे कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह गोलानी ब्रिगेड के कमांडर रहे। इसके अलावा उन्होंने वेस्ट बैंक में यहूदिया और सामरिया डिवीजन के प्रमुख, सेना के ऑपरेशंस विभाग के प्रमुख और उत्तरी कमान के प्रमुख के रूप में भी काम किया।

साल 2013 में उन्हें सेना का डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया गया। इसके बाद 16 फरवरी 2015 को तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें इस्राइल डिफेंस फोर्सेज का प्रमुख बनाया।

करीब 40 साल के सैन्य करियर में वह 2015 से 2019 तक इस्राइल के सेना प्रमुख रहे। लगभग 41 साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति ले ली।

नेतन्याहू के साथ किया काम, फिर कैसे बने राजनीतिक विरोधी?

गादी आइजेनकोट और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच पहले पेशेवर संबंध रहे हैं। नेतन्याहू ने ही 2015 में उन्हें इस्राइल की सेना की सर्वोच्च कमान सौंपी थी। हालांकि, समय के साथ दोनों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद बढ़ते गए।

अक्तूबर 2023 में हमास के हमले के बाद आइजेनकोट नेतन्याहू की आपातकालीन सरकार में शामिल हुए थे। वह युद्ध कैबिनेट के पर्यवेक्षक सदस्य भी बने। लेकिन जून 2024 में उन्होंने और बेनी गैंट्ज ने सरकार से इस्तीफा दे दिया।

आइजेनकोट का आरोप था कि सरकार के पास युद्ध को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर राजनीतिक हित हावी हो रहे हैं। उन्होंने 7 अक्तूबर के हमास हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा चूकों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की थी।

उनका कहना था कि सरकार और सुरक्षा तंत्र की विफलताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सेना प्रमुख रहते हुए भी विवादों में रहे

आइजेनकोट के सेना प्रमुख रहने के दौरान 2016 में एक विवादित घटना हुई थी। हेब्रोन में सार्जेंट एलोर अजारिया ने एक घायल फलस्तीनी हमलावर को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी।

इस मामले