- नमो घाट पर पहली बार भव्य एयर शो का आयोजन
- राफेल, सुखोई और तेजस समेत 50 से अधिक विमानों का प्रदर्शन
- सारंग हेलीकॉप्टरों ने आसमान में बनाई दिल और तिरंगे की आकृति
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचेंगे
|
Wings Over Ganga Air Show: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा की लहरों के ऊपर कहीं रफ्तार का विस्फोट, कहीं पलक झपकते दिशा बदलते लड़ाकू विमान और कहीं हेलीकॉप्टरों से आसमान में उभरता तिरंगा। ये सब पहली बार था। गुरुवार को काशी का आकाश भारतीय वायुसेना के शौर्य का ऐसा जीवंत मंच बन गया, जहां हर उड़ान अपने पीछे रोमांच की नई इबारत लिखती रही। नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ में विमानों की गर्जना, उनकी समयबद्ध आमद और हैरतअंगेज हवाई संरचनाओं ने दर्शकों को देर तक निगाहें आसमान पर टिकाए रखा। पहले दिन 50 से अधिक विमानों के प्रदर्शन ने सैन्य सामर्थ्य, पायलटों के कौशल और वायुसेना की समन्वित क्षमता का विराट दृश्य प्रस्तुत किया।
वाराणसी में पहली बार इस तरह के एयर शो का आयोजन किया जा रहा है जिसे देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी 25 अक्टूबर को अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचने वाले हैं। इससे पहले 24 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भी वाराणसी पहुंचने का कार्यक्रम है और वह दो दिन यहां रहेंगे।
हेलीकॉप्टरों ने बनाया ‘वरुणा फॉर्मेशन
पूर्वाह्न 11:40 बजे से हवाई प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। करीब 11:50 बजे लड़ाकू विमानों की गर्जना ने आयोजन को रोमांच के चरम की ओर बढ़ाया। सबसे पहले भारतीय वायुसेना और थलसेना के तीन एएलएच मार्क-III हेलीकॉप्टरों ने ‘वरुणा फॉर्मेशन’ बनाया। इसके साथ रस्सियों के सहारे जवानों के नीचे उतरने का प्रदर्शन हुआ, जिसने सैन्य अभियान में हेलीकॉप्टरों की उपयोगिता और जवानों की दक्षता को सामने रखा।
राफेल की न्यूनतम गति
इसके बाद अत्याधुनिक राफेल की गर्जना ने गंगा के ऊपर रोमांच भर दिया। तेज गति से उड़ान भरते हुए विमान ने अचानक दिशा बदली और ऊंचाई तथा कोण में तीव्र परिवर्तन कर अपनी वायुगतिकीय क्षमता का प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार राफेल ने लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की न्यूनतम गति पर भी करतब दिखाए। ‘केदार फॉर्मेशन’ के बाद कम ऊंचाई पर किए गए सटीक हवाई करतबों ने दर्शकों की सांसें थाम दीं। सुखोई-30 एमकेआई ने मुख्य मंच के ऊपर से तेज रफ्तार उड़ान भरी तो उसकी गर्जना दूर-दूर तक सुनाई दी। दोपहर 12:00 बजे के बाद सुखोई के प्रदर्शन ने दर्शकों के उत्साह को और बढ़ा दिया।
तीन विमानों का ‘वी’ आकार
सूर्यकिरण टीम के तीन विमानों ने विजय के प्रतीक ‘वी’ आकार के विक फॉर्मेशन में उड़ान भरकर ‘विश्वनाथ फॉर्मेशन’ प्रस्तुत किया। वहीं, सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल से आकाश में दिल की आकृति बनाई। हेलीकॉप्टरों ने गंगा के ऊपर पुष्पवर्षा की और उड़ान संरचनाओं के जरिए तिरंगे की छटा बिखेरी। राजघाट पुल के ऊपर से गुजरती हेलीकॉप्टरों की कतार और वापसी में तिरंगे के रंगों की संरचना ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मिग-29 ने बनाया तीर की नोक
चिनूक हेलीकॉप्टर ने गंगा की सतह को छूते हुए उड़ान भरी। वहीं, दो चिनूक और दो एएलएच मार्क-IV हेलीकॉप्टरों की उल्टी ‘विक्ट्री फॉर्मेशन’ ने अपनी विशिष्ट संरचना से ध्यान खींचा। जगुआर, मिराज-2000, तेजस और मिग-29 ने तीर की नोक जैसी संरचना में उड़ान भरकर वायुसेना की सामूहिक उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया। दोपहर 12:30 बजे हेलीकॉप्टर से जलयान पर कमांडो के रस्सी के सहारे उतरने और अपनी स्थिति संभालने का दृश्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।
प्रशिक्षण विमान की भी तेज रफ्तार
हवाई करतबों के बीच बीएई हॉक एमके-132 उन्नत जेट प्रशिक्षण विमान ने भी अपनी तेज रफ्तार और उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया। गंगा के ऊपर विमानों की गर्जना, हेलीकॉप्टरों की सटीक संरचनाएं और पायलटों का आपसी समन्वय पूरे आयोजन की प्रमुख पहचान बने। अंत में महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज में गूंजते देशभक्ति संदेश और उनकी आवाज के अनुरूप कथक नृत्यांगनाओं की प्रस्तुति ने सैन्य शौर्य के इस आयोजन को सांस्कृतिक रंग दिया।
‘सारनाथ’ ने भी भरी उड़ान
एयर शो में विंटेज विमान ‘सारनाथ’ का प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहा। एयर वाइस मार्शल पीवीएस नारायण के अनुसार, काशी की ऐतिहासिक पहचान से आयोजन को जोड़ने के उद्देश्य से इस विमान को शामिल किया गया। कबाड़ से पुनर्जीवित कर वायुसेना के विंटेज बेड़े में शामिल किए गए इस विमान ने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान कश्मीर घाटी की रक्षा और 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।