योगी ने कहा, गोरक्षपीठ का राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान

योगी ने कहा, गोरक्षपीठ का राम मंदिर आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान
  • महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह
  • गोरक्षपीठ के पूज्य संतों ने श्रीराम मंदिर के लिए जीवन समर्पित किया
  • समय, समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलना ही महापुरुषों का गुण: सीएम 

Yogi Adityanath on Ram Mandir गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ के दोनों पूर्व पीठाधीश्वरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री के मुताबिक, रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ मौजूद रहे, जबकि श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का नेतृत्व महंत अवेद्यनाथ ने किया था।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दोनों संतों ने संत समाज को एकजुट करने के साथ श्रीराम मंदिर, समाज और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि समय, समाज और राष्ट्र के अनुकूल चलना महापुरुषों का गुण होता है। मुख्यमंत्री ने अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ की 12वीं और महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उनके जीवन और आदर्शों को याद किया।

शिवभक्ति और लोक कल्याण का संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव की भक्ति करने वालों को सम-विषम परिस्थितियों में समान और निश्छल रहने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने शिव के विषपान का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज की विसंगतियों को अपने भीतर समाहित कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना ही शिवत्व है।

योगी ने महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ के शिक्षा क्षेत्र में योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महंत अवेद्यनाथ ने शिक्षा को कौशल विकास और स्वावलंबन से जोड़ने के साथ कई संस्थाओं की स्थापना की तथा छात्रों के लिए छात्रावास और छात्रवृत्ति जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया।

कार्यक्रम में विभिन्न संतों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी दोनों महंतों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामजन्म सिंह की पुस्तक ‘रामकथा के प्रथम बलिदानी जटायु’ का विमोचन भी किया।