हाइलाइट्स
- ● वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अनाम सूत्रों के हवाले से किया दावा
- ● तीनों तकनीकी दिग्गजों ने ट्रंप से अलग-अलग बातचीत की
- ● गूगल के वैज्ञानिक ने फिनरा जैसी AI निगरानी संस्था का प्रस्ताव दिया था
- ● प्रस्ताव को लेकर प्रमुख AI कंपनियों में शक्ति केंद्रित होने की आशंका
- ● व्हाइट हाउस में AI नियमन पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण बताया गया
AI Regulation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI उद्योग के लिए प्रस्तावित एक नियामक संस्था बनाने की पहल आगे नहीं बढ़ाई। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, स्पेसएक्सएआई के एलन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग ने पिछले महीने ट्रंप से अलग-अलग बातचीत कर इस प्रस्ताव का विरोध किया था। रिपोर्ट में मामले से परिचित अनाम सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।
फिनरा जैसी संस्था बनाने का प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ AI कंपनियों के अधिकारियों की ओर से वित्तीय उद्योग नियामक प्राधिकरण FINRA जैसी उद्योग-वित्त पोषित निगरानी और मानक संस्था बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। यह प्रस्ताव गूगल के मुख्य वैज्ञानिक डेमिस हासाबिस की ओर से दिया गया था। हासाबिस गूगल की एआई इकाई डीपमाइंड के प्रमुख भी हैं।
प्रस्ताव का उद्देश्य एआई उद्योग के लिए निगरानी और मानक तय करने वाली एक ऐसी संस्था बनाना था, जिसे उद्योग के स्तर पर वित्त पोषित किया जाता।
तीनों अरबपतियों ने जताई आपत्ति
जर्नल के अनुसार, जुकरबर्ग, मस्क और हुआंग की आपत्ति का एक कारण यह आशंका थी कि ऐसी व्यवस्था से अमेरिका की तीन प्रमुख एआई प्रयोगशालाओं—ओपनएआई, एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड—के हाथों में और अधिक शक्ति केंद्रित हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों ने ट्रंप के साथ अलग-अलग बातचीत में अपनी चिंताएं रखीं। इसके बाद राष्ट्रपति ने नियामक संस्था स्थापित करने से जुड़े प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया।
व्हाइट हाउस में सहमति बनाना चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशासन के अधिकारियों ने शीर्ष एआई कंपनियों के अधिकारियों से बातचीत में माना है कि व्हाइट हाउस के स्तर पर एआई नियमन का ढांचा तैयार करने को लेकर सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका एक कारण यह भी है कि प्रस्तावित नियामक व्यवस्था का विरोध करने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क कर रहे हैं।