इस देश के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र को बताया ‘बेकार संगठन’

इस देश के राष्ट्रपति संयुक्त राष्ट्र को बताया ‘बेकार संगठन’
हाइलाइट्स :
• अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए
• कोविड लॉकडाउन, आव्रजन, मानवाधिकार और इजरायल नीति को लेकर आलोचना की
• कहा- प्रस्तावों का असर न हो तो संस्था अपनी प्रासंगिकता खो देती है

Argentina President Javier Milei on UN : अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान संगठन की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को “बेकार संगठन” बताते हुए कहा कि उसके प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव तभी होगा, जब उनके उल्लंघन पर परिणाम सुनिश्चित हों। माइली ने कहा कि संस्था के पास शब्दों और प्रस्तावों की कमी नहीं है, बल्कि “परिणामों की कमी” है।

माइली ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए लॉकडाउन, आव्रजन, मानवाधिकार और इजरायल से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महामारी के दौरान संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकायों ने वैज्ञानिक प्रमाणों और देशों की संप्रभुता की अनदेखी करते हुए जबरन लॉकडाउन की नीतियों को बढ़ावा दिया।

उन्होंने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की आलोचना की। माइली ने कहा कि संगठन उन व्यवस्थाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा, जिन्हें वह मानवाधिकार और सामूहिक सुरक्षा के लिए चुनौती मानते हैं। उन्होंने इजरायल को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के मतदान रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया।

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने फॉकलैंड द्वीप समूह, जिसे अर्जेंटीना माल्विनास कहता है, के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी विवाद में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का प्रभाव दिखाई नहीं दिया। उनके अनुसार, यदि किसी संस्था के शब्द वास्तविक दुनिया में प्रभावी नहीं होते तो उसकी प्राधिकरण क्षमता कमजोर होती है।

माइली ने संयुक्त राष्ट्र की बढ़ती नौकरशाही और उसके दायरे को लेकर भी सवाल उठाए तथा कहा कि संस्था को अपनी भूमिका और प्रभावशीलता पर पुनर्विचार करना चाहिए।