Chitrakoot Floods: 23 साल बाद आई सबसे भीषण बाढ़, मंदाकिनी खतरे के निशान से 4.550 मीटर ऊपर

Chitrakoot Floods: 23 साल बाद आई सबसे भीषण बाढ़, मंदाकिनी खतरे के निशान से 4.550 मीटर ऊपर

29 अगस्त की बाढ़ के बाद चित्रकूट में हालात संभलने से पहले ही लगातार बारिश ने मंगलवार को फिर मुश्किल बढ़ा दी। मंदाकिनी समेत कई नदियों के उफान और बरुआ, ओहन, गुंता व रसिन बांधों के गेट खोले जाने के बाद धर्मनगरी के 84 कोस क्षेत्र में कई जगह पानी भर गया।

मंदाकिनी का जलस्तर तड़के चार बजे से तेजी से बढ़ा। साढ़े सात बजे तक साढ़े तीन घंटे में इसमें 3.10 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे नदी का जलस्तर 131.050 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 126.500 मीटर से 4.550 मीटर ऊपर था।

रामघाट समेत कई इलाकों में भरा पानी

मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की दुकानें, टेंपो स्टैंड, पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग और नदी किनारे की बस्तियां प्रभावित हुईं। रामघाट और तरौंहा से 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

रैन बसेरा और टाउन हाल में बनाए गए राहत शिविरों में 63 लोगों ने शरण ली है। रामघाट और निर्मोही अखाड़ा क्षेत्र में ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

लगातार बारिश के कारण बरुआ, ओहन, गुंता और रसिन बांधों में पानी भर गया, जिसके बाद इनके गेट खोलने पड़े। इससे करीब 24 गांवों के निचले इलाकों में पानी पहुंच गया। बाढ़ से करीब 475 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 50 से अधिक मकान गिर गए।

14 वर्षीय मीनू यादव की तलाश जारी

कई रपटों के डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है। मानिकपुर-सतना मार्ग का कारी बराह रपटा भी फिर बह गया।

डीएम पुलकित गर्ग के मुताबिक, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की 10 टीमें राहत और बचाव अभियान में लगी हैं। कंट्रोल रूम भी सक्रिय है।

बूढ़ा सेमरवार गांव में नाले में हाथ-पैर धोते समय पैर फिसलने से 14 वर्षीय मीनू यादव बह गई। उसकी तलाश जारी है।

गंगा-यमुना समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा

प्रदेश में गंगा-यमुना समेत प्रमुख नदियों का जलस्तर कुछ स्थानों पर कम हुआ है, लेकिन बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है। प्रयागराज में मंगलवार को गंगा चार सेंटीमीटर और यमुना 11 सेंटीमीटर घटीं। इसके बावजूद कई मोहल्लों और गांवों में पानी भरा हुआ है और 11 स्थानों पर नावों से आवागमन हो रहा है।

वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु से तीन सेंटीमीटर ऊपर 70.29 मीटर पर लगभग स्थिर हैं। घाटों के बाद पानी गलियों और सड़कों तक पहुंच गया है। वरुणा में पलट प्रवाह के कारण कई घरों में पानी घुस गया और गांवों का संपर्क कट गया। सुरक्षा के मद्देनजर नाव संचालन रोककर जल पुलिस और ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

बलिया में गंगा खतरे के निशान से 1.185 मीटर ऊपर 58.80 मीटर और गाजीपुर में 15 सेंटीमीटर ऊपर 63.260 मीटर पर हैं। मीरजापुर के 13 गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। चंदौली में बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है।

आजमगढ़ में 24 घंटे में गंगा 11 सेंटीमीटर बढ़ी। फर्रुखाबाद में गंगा पांच सेंटीमीटर घटकर 136.65 मीटर पर पहुंच गई, जबकि रामगंगा में 10 सेंटीमीटर बढ़ाव दर्ज किया गया।

कई जिलों में बाढ़ से नुकसान

उन्नाव में हजारों बीघा फसल जलमग्न है। कानपुर देहात में कच्चा मकान गिरने से सात माह की बच्ची की मौत हो गई। सोनभद्र में रिहंद बांध का जलस्तर अधिकतम सीमा पार करने के बाद फाटक खोलकर 10,400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।

गाजीपुर में दो बहनों के डूबने और मीरजापुर में दो लोगों के लापता होने से चिंता बढ़ गई है।

बहराइच और बाराबंकी में घाघरा खतरे के ऊपर

अवध क्षेत्र में बारिश के बीच घाघरा (सरयू) समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ा है। बहराइच में घाघरा खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर 106.08 मीटर पर बह रही है। छह गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

बाराबंकी में भी घाघरा खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर ऊपर है। गोंडा के बाढ़ प्रभावित गांवों में 62 नावें लगाई गई हैं। लखीमपुर के तिकुनिया में मोहाना नदी के कटान से एक घर बह गया।

सीतापुर में घाघरा और शारदा खतरे के करीब हैं, जबकि अयोध्या और अंबेडकरनगर में सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। अमेठी में कच्ची दीवार गिरने से सात वर्षीय बच्ची की मौत हुई। हरदोई में दीवार गिरने से वृद्ध की मृत्यु हुई और चार लोग घायल हुए हैं।