अखिलेश यादव का कृष्ण सुदामा दांव
अयोध्या से पवन पांडे को बनाया पहला उम्मीदवार
2022 में 77 सीट और आतीं बशर्ते 5 लाख वोट जुट जाते
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी का पहला टिकट सार्वजनिक तौर पर घोषित कर दिया है।
टिकट की ये घोषणा तीन संयोगों के साथ हुई।पहला यह कि इसे छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र की जयंती पर घोषित किया गया। दूसरा यह कि टिकट अयोध्या सीट का घोषित हुआ। और तीसरी बात ये कि यह टिकट एक ब्राह्मण कैंडिट को दिया गया।
इसके साथ ही अकिलेश ने कृष्ण-सुदामा की दोस्ती का हवाला देकर ब्राह्मणों को पार्टी फोल्ड में लाने का पासा फेंका है। इतना ही नहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में गढ़े अपने PDA की परिभाषा का विस्तार भी उन्होंने
‘पीडीए में पीड़ित पंडित ‘ का शार्ट फार्म भी तय कर दिया।’ गोरखपुर का हाता नहीं भात’ जुमला भी वह उछालते रहे हैं।
दरअसल अखिलेश यादव और उनकी पार्टी यह मानकर चल रहे हैं कि अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी से बीजेपी के इस वोट बैंक पैदा हुए ‘संदेह’ को वो भुनाने में सफल हो जाएंगे।
अखिलेश यादव ये अच्छी तरह जानते हैं उनकी पार्टी के परम्परागत मुस्लिम यादव कम्बिनेशन में कुछ ओर वोटबैंक जोड़ने की ज़रूरत है। तभी 2027 में वह बीजेपी को टक्कर दे सकेंगे।
इसे इस बात से समझा जा सकता है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में सपा को अगर कुल मिलाकर पाँच लाख वोट और मिल गये होते तो वह बहुमत के आंकड़े पर पहुँच जाती क्योंकि 77 सीटों पर उसके उम्मीदवार 200 से लेकर क़रीब साढ़े तेरह हज़ार के अंतर से हारी।
ऐसे में अयोध्या का टिकट उन्होंने सबसे पहले घोषित करते हुए पवन पांडे को उम्मीदवार बनाया है। पवन पांडे ब्राह्मण होने के साथ ही पूर्व में शिवसैनिक रह चुके हैं। इस क़दम का मक़सद साफ़ है कि यूपी में दस प्रतिशत की आबादी वाले ब्राह्मण समुदाय से कुछ वोट खींचा जाए। दरअसल ये वो वोट बैंक है जो मोटे तौर पर हर सीट पर फैला हुआ है। इस लिहाज़ से ये बूँद-बूंद से घड़ा भरने वाला साबित होता है।
हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की पार्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन वोटों के प्रतिशत में वो बीजेपी से पीछे ही है।