‘पनीर’ नाम पर नहीं बिकेगी ये वाली ‘पनीर’

‘पनीर’ नाम पर नहीं बिकेगी ये वाली ‘पनीर’
हाइलाइट्स :
• FSSAI ने खाद्य नियमों में संशोधन का मसौदा प्रस्तावित किया
• दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने उत्पादों को ‘पनीर’ बताने पर रोक
• प्रस्ताव पर जनता और हितधारकों से 60 दिन में मांगे गए सुझाव

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण FSSI ने दूध से प्राप्त घटकों से नहीं बने एनालॉग उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया है। प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य उत्पाद की प्रकृति और संघटन को लेकर उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाना है।

प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) संशोधन विनियम, 2026 में मौजूदा विनियमों के विनियम 2.1.1 के तहत नया खंड जोड़ने का प्रस्ताव है। इसमें विशेष रूप से ऐसे ‘पनीर’ को शामिल किया गया है, जो दूध से प्राप्त घटकों से निर्मित नहीं है।

मसौदे के अनुसार, ‘डेयरी संदर्भ में एनालॉग’ श्रेणी के तहत पहले से लाइसेंस प्राप्त या पंजीकृत उत्पाद अपने नाम, लेबलिंग या विपणन में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। FSSI  का कहना है कि उत्पाद का नाम और प्रस्तुतीकरण उसकी वास्तविक प्रकृति और संघटन के अनुरूप होना चाहिए, ताकि उपभोक्ता जानकारी के आधार पर विकल्प चुन सकें।

चूंकि यह अभी मसौदा विनियम है, इसलिए FSSI ने हितधारकों और आम जनता से आपत्तियां तथा सुझाव मांगे हैं। राजपत्र में अधिसूचना की प्रतियां उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिन की अवधि पूरी होने के बाद इन सुझावों पर विचार किया जाएगा।

प्रस्तावित संशोधन खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से तैयार किया गया है।