Ganesh Visarjan 2026: क्या शुभ मुहूर्त के बिना कर सकते हैं बप्पा का विसर्जन? जानें नियम

Ganesh Visarjan 2026: क्या शुभ मुहूर्त के बिना कर सकते हैं बप्पा का विसर्जन? जानें नियम

Ganesh Visarjan 2026: गणपति उत्सव के दौरान घर में बप्पा की स्थापना के बाद भक्त श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं और तय अवधि पूरी होने पर विसर्जन करते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि अगर शुभ मुहूर्त पर विसर्जन करना संभव न हो तो क्या गणपति की प्रतिमा को बिना मुहूर्त के विदा किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विशेष परिस्थिति में शुभ मुहूर्त के बिना भी गणपति विसर्जन किया जा सकता है। हालांकि, शुभ मुहूर्त या चौघड़िया देखकर बप्पा की विदाई करना उत्तम माना जाता है। साथ ही राहुकाल और अशुभ चौघड़िया में विसर्जन से बचने की सलाह दी जाती है।

2026 में कब है अनंत चतुर्दशी?

गणपति उत्सव का मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। साल 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को है। इसी दिन भगवान गणेश की पूजा के बाद शुभ समय देखकर बप्पा की विदाई की जाएगी।

अनंत चतुर्दशी: 25 सितंबर 2026, शुक्रवार

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 25 सितंबर को सुबह 01:48 बजे

विसर्जन का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी देखना चाहिए।

क्या बिना शुभ मुहूर्त के गणपति विसर्जन किया जा सकता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी विशेष परिस्थिति में शुभ मुहूर्त पर विसर्जन संभव नहीं हो तो बप्पा का विसर्जन किया जा सकता है। फिर भी शुभ चौघड़िया देखकर विसर्जन करना बेहतर माना जाता है।

विसर्जन के लिए सुबह, दोपहर या संध्या के शुभ चौघड़िया में से उपयुक्त समय चुना जा सकता है। वहीं राहुकाल या अशुभ चौघड़िया में गणपति विसर्जन करने से बचने की सलाह दी जाती है।

बप्पा को विदा करने से पहले अंतिम पूजा, आरती और भोग अर्पित करने की परंपरा है। बिना पूजा और विधि-विधान के गणेश प्रतिमा को स्थान से हटाने से बचना चाहिए।

किन परिस्थितियों में गणपति विसर्जन से बचना चाहिए?

गणपति विसर्जन के दौरान धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। कुछ बातों को विशेष रूप से ध्यान में रखने की सलाह दी जाती है।

राहुकाल और अशुभ चौघड़िया

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल या अशुभ चौघड़िया में बप्पा की विदाई करने से बचना चाहिए। अपनी सुविधा के अनुसार शुभ समय चुनकर विसर्जन की तैयारी की जा सकती है।

अंतिम पूजा और भोग के बिना मूर्ति न हटाएं

विसर्जन से पहले भगवान गणेश को मोदक या अन्य नैवेद्य का भोग लगाने की परंपरा है। इसके बाद अंतिम आरती करें और पूजा में हुई भूल-चूक के लिए बप्पा से क्षमा प्रार्थना करें। इन परंपराओं को पूरा करने के बाद ही प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाना चाहिए।

संकल्प के बीच अचानक न करें विसर्जन

गणपति स्थापना के समय भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिनों का संकल्प लेते हैं। मान्यता के अनुसार, जितने दिनों के लिए संकल्प लिया गया हो, उसे पूरा करने का प्रयास करना चाहिए। बिना किसी विशेष कारण के संकल्प के बीच अचानक विसर्जन करने से बचना चाहिए।

गणपति विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

बप्पा की विदाई के समय केवल पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य परंपराओं का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है।

बप्पा के मुख की दिशा

धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति जी की प्रतिमा को विसर्जन के लिए घर से बाहर ले जाते समय उनका मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए। इसे बप्पा के घर से विदा होने और दोबारा आने की परंपरा से जोड़कर माना जाता है।

विसर्जन के दिन तुरंत न हटाएं पूरी सजावट

गणपति विसर्जन वाले दिन पूरी सजावट या चौकी को तुरंत हटाने के बजाय अगले दिन साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है। हालांकि, यह परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।

पूजा सामग्री का सम्मानपूर्वक निपटान करें

गणपति पूजा में इस्तेमाल फूल, हार और अन्य पूजन सामग्री को कचरे में फेंकने से बचने की सलाह दी जाती है। इन्हें सम्मानपूर्वक अलग तरीके से रखा या निपटाया जा सकता है। मूर्ति के विसर्जन के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

गणपति विसर्जन की विधि क्या है?

बप्पा की विदाई से पहले पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया श्रद्धा के साथ पूरी की जाती है। इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अंतिम पूजा, भोग और आरती

विसर्जन से पहले भगवान गणेश को स्नान या शुद्ध जल अर्पित करने की परंपरा हो तो उसे पूरा करें। इसके बाद मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं और अंतिम आरती करें।

भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना

पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा मांगने की परंपरा है। बप्पा से अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।

विधि-विधान से जल विसर्जन

घर पर विसर्जन करने के लिए साफ पात्र या बाल्टी में जल भरा जा सकता है और इसमें गंगाजल मिलाना चाहिए। बप्पा को श्रद्धा के साथ अगले बरस जल्दी आने का निवेदन करें और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से विसर्जन करें।

स्वच्छता का रखें ध्यान

गणपति विसर्जन के दौरान शुभ मुहूर्त, अंतिम पूजा, क्षमा प्रार्थना और परिवार की परंपराओं का ध्यान रखते हुए बप्पा को विदा करें।

धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है जानकारी

इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। News Corridors इसकी पुष्टि नहीं करता है।