दिल्ली में वोट की लड़ाई, सियासत में संग्राम

दिल्ली में वोट की लड़ाई, सियासत में संग्राम
  • INDIA गठबंधन ने रामलीला मैदान में की ‘वोट बचाओ’ रैली
  • खरगे ने ज्ञानेश कुमार को हटाने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही
  • राहुल ने पीएम मोदी और अमित शाह से जवाब मांगने की चेतावनी दी
  • ममता ने कहा- विपक्ष चुनावी लड़ाई में हारा नहीं, हराया गया
  • संबित पात्रा ने 10 लाख की भीड़ के दावे को चुनौती दी

INDIA Alliance Vote Bachao Rally: चुनावी निष्पक्षता और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर रविवार को दिल्ली का रामलीला मैदान सियासी संग्राम का केंद्र बन गया। INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ रैली कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत कई विपक्षी नेता रैली में शामिल हुए। विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

रैली से पहले विपक्षी दलों के नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर एकत्र हुए। वहां से नेता और कार्यकर्ता जुलूस के रूप में रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। इस दौरान ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे लगाए गए। विपक्षी दलों ने इस आयोजन को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए अपनी साझा मुहिम का हिस्सा बताया।

खरगे बोले- ज्ञानेश कुमार को हटाने तक जारी रहेगी लड़ाई

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे, विपक्ष की लड़ाई जारी रहेगी। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्ष को डराने तथा मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

खरगे ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव संचालन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्षी दलों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उनके संबोधन का प्रमुख केंद्र चुनाव आयोग की जवाबदेही और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग रही।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को भी घेरा

राहुल गांधी ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी जवाबदेह ठहराने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के जरिए लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि इस मामले में ज्ञानेश कुमार के बाद प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को भी जवाब देना होगा।

उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को गंभीर बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मामले को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखेगा। उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

ममता बनर्जी ने एसआईआर और मतगणना पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण और मतगणना की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी लड़ाई में हारा नहीं, बल्कि उसे हराया गया। ममता ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां रखते हुए आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार से वोट चोरी की शुरुआत हुई। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को विपक्ष की लड़ाई का अहम हिस्सा बताया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती समेत अन्य नेताओं ने भी मंच से चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुटता का दावा

रैली में विपक्षी नेताओं के भाषणों का मुख्य विषय चुनाव आयोग, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी रहा। नेताओं ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। विपक्ष ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा।

विपक्षी दलों ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर वे संयुक्त रूप से आवाज उठाएंगे। खरगे ने ज्ञानेश कुमार को हटाने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही, जबकि राहुल गांधी ने इस मामले में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। इस तरह रैली के मंच से विपक्ष ने अपनी आगे की राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के संकेत दिए।

भाजपा ने रैली को बताया सुपर फ्लॉप

रैली समाप्त होने के बाद भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर INDIA गठबंधन के दावों और आयोजन की सफलता पर सवाल उठाए। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने रामलीला मैदान की रैली को ‘सुपर फ्लॉप’ करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने रैली में 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया था, लेकिन मैदान की तस्वीरें इस दावे से मेल नहीं खातीं।

पात्रा ने कहा कि भाजपा सुबह से रैली पर नजर रख रही थी और राहुल गांधी का भाषण भी सुना। उनके मुताबिक, रामलीला मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली था। उन्होंने दावा किया कि रैली स्थल पर 28 हजार कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें दोपहर साढ़े तीन से चार बजे के बीच पांच से सात हजार कुर्सियां खाली थीं। पात्रा ने मैदान की तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए कांग्रेस के भीड़ संबंधी दावे पर सवाल उठाए।

'केवल राजनीतिक हथकंडों से प्रधानमंत्री नहीं बन सकते'

संबित पात्रा ने कहा कि इतने दलों और नेताओं के एक मंच पर आने के बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपेक्षित भीड़ जुटाने में नाकाम रहे। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक हथकंडों से कोई नेता या प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। इसके लिए पसीना बहाना और मेहनत करना जरूरी है।