Janmashtami 2026: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत? जानें जरूरी बातें

Janmashtami 2026: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत? जानें जरूरी बातें

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उस समय रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित थे, इसलिए जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग को विशेष महत्व दिया जाता है।

जीरकपुर के वीआईपी रोड पर निर्मल छाया में स्थित शिव दुर्गा मंदिर के आचार्य ज्योतिर्विद सुनील किमोठी के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी की रात रोहिणी नक्षत्र के साथ हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का प्रभाव भी रहेगा।

किन लोगों को जन्माष्टमी का व्रत नहीं रखना चाहिए?

आचार्य सुनील किमोठी के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत श्रद्धा से किया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपवास करना उचित नहीं होता। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर व्रत रखना चाहिए।

बुजुर्गों के लिए लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी, लो ब्लड शुगर या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोग अपनी सेहत के अनुसार व्रत या फलाहार कर सकते हैं। अस्वस्थ होने पर व्रत रखने से बचना बेहतर है।

गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण और पानी की जरूरत होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला या लंबे समय का उपवास नहीं रखना चाहिए। वे व्रत के बजाय भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सकती हैं।

डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी संबंधी बीमारी या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को उपवास करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। दवाइयां लेने वाले लोगों के लिए भी लंबे समय तक भोजन न करना उचित नहीं हो सकता।

जन्माष्टमी व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?

आचार्य सुनील किमोठी के अनुसार जन्माष्टमी व्रत के धार्मिक नियम श्रद्धालु अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार अपनाते हैं। आम तौर पर इस दिन अनाज का सेवन नहीं किया जाता और फलाहार किया जाता है।

व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखने की बात कही गई है:

* तामसिक भोजन से दूर रहें।
* क्रोध, झूठ और विवाद से बचें।
* ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करें।
* रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा और आरती करें।

भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाएं

जन्माष्टमी की पूजा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती की जाती है।

भगवान को माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी दल शामिल करना शुभ माना जाता है।

मनोकामना के अनुसार श्रीकृष्ण को क्या अर्पित करें?

आचार्य सुनील किमोठी की मान्यताओं के मुताबिक अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए भगवान श्रीकृष्ण को अलग-अलग चीजें अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है।

धन और वंश वृद्धि के लिए: पीले फूल पर इत्र लगाकर भगवान को अर्पित करने की मान्यता है।
वैवाहिक और न्यायिक कार्यों में सफलता के लिए: हल्दी और केसर अर्पित करने की परंपरा बताई जाती है।
स्वास्थ्य लाभ के लिए: गुड़ से बनी खीर या हलवे का भोग लगाने की मान्यता है।
सौंदर्य और निरोगी काया के लिए: माखन और दूध से बनी वस्तुओं का भोग लगाया जाता है।