गेहूं MSP बढ़ा; दिल्ली ट्रैफिक होगा स्मार्ट

गेहूं MSP बढ़ा; दिल्ली ट्रैफिक होगा स्मार्ट
Highlights
• कैबिनेट के बड़े फैसले
• कैबिनेट ने गेहूं MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी की
• गेहूं का नया MSP 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हुआ
• दिल्ली ITMS परियोजना के लिए 1,789.52 करोड़ मंजूर
• ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को मिली मंजूरी

Modi Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। इनमें गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था को स्मार्ट बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम ITMS और तीसरे चरण की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर Green Energy Corridor योजना प्रमुख हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इन फैसलों की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, नए फैसलों का असर कृषि, शहरी परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर पड़ेगा।

दिल्ली में स्मार्ट होगी ट्रैफिक व्यवस्था

दिल्ली में ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ITMS लागू करने को मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने इस परियोजना के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

इस सिस्टम के जरिए ट्रैफिक सिग्नल को सड़क पर मौजूद ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार बदला जा सकेगा। साथ ही सड़क पर होने वाली घटनाओं की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना को दिल्ली पुलिस लागू करेगी।

गेहूं MSP में 25 रुपये की बढ़ोतरी

सरकार ने 2027-28 सत्र के लिए गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। अश्विनी वैष्णव के अनुसार, गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है।

सरकार ने गेहूं के अलावा पांच अन्य रबी फसलों के MSP में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। MSP तय करने में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों को आधार बनाया गया है। उत्पादन लागत के साथ घरेलू और वैश्विक कीमतों के रुझान तथा अल-नीनो की आशंका जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा गया है।

तीसरे चरण के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर को मंजूरी

कैबिनेट ने तीसरे चरण की ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना पर कुल 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए राज्य के भीतर पारेषण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए जरूरी ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।