भारतवंशी नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार, यौन हिंसा और नरसंहार से जुड़े फैसलों ने दिलाई पहचान

भारतवंशी नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार, यौन हिंसा और नरसंहार से जुड़े फैसलों ने दिलाई पहचान
हाइलाइट्स
• नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार 2026
• यौन हिंसा को नरसंहार से जोड़ने में अहम भूमिका
• 2008 से 2014 तक UN मानवाधिकार प्रमुख रहीं
• दक्षिण अफ्रीका की पहली अश्वेत महिला हाई कोर्ट जज

दक्षिण अफ्रीका की जानी-मानी न्यायविद् नवनीनम 'नवी' पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में इसकी घोषणा की गई। उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के लिए किए गए असाधारण प्रयासों के सम्मान में यह पुरस्कार दिया गया है।

नवी पिल्लई ने अपने लंबे करियर में अंतरराष्ट्रीय कानून को अधिक प्रभावी बनाने और गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय की दिशा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रवांडा के अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में जज के रूप में काम करते हुए उन्होंने ऐसे कानूनी सिद्धांतों को स्थापित करने में योगदान दिया, जिनसे यौन हिंसा और नरसंहार से जुड़े मामलों में न्याय का दायरा व्यापक हुआ।

रवांडा न्यायाधिकरण में ऐतिहासिक भूमिका

नवी पिल्लई के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में उनकी भूमिका शामिल है। यहां उनके प्रभाव से यह कानूनी सिद्धांत स्थापित हुआ कि दुष्कर्म और यौन हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार का हिस्सा माना जा सकता है।

इसी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान नफरती प्रचार के जरिए नरसंहार भड़काने के मामले में भी एक अहम कानूनी सफलता मिली। पहली बार केवल नफरती प्रोपेगैंडा फैलाकर नरसंहार के लिए उकसाने के आधार पर किसी आरोपी पर मुकदमा चलाया गया।

नवी पिल्लई ने अपनी निष्पक्षता, कानूनी विशेषज्ञता और दृढ़ता के जरिए यह दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था युद्ध और हिंसा से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई करने में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

भारतीय मूल की हैं नवी पिल्लई

नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक गरीब परिवार में हुआ था। वह भारतीय तमिल मूल की हैं। उनके दादा-दादी 1890 के दशक में भारत से दक्षिण अफ्रीका गए थे।

उन्होंने कानून के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश बनीं। इसके अलावा, प्रतिष्ठित हार्वर्ड लॉ स्कूल से कानून में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाली वह पहली दक्षिण अफ्रीकी नागरिक भी हैं।

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्याय संस्थानों में निभाईं जिम्मेदारियां

नवी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वह 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं।

इसके अलावा, उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) की अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं।

उनके कार्यकाल और कानूनी योगदान ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र की सम्मानित हस्तियों में शामिल किया है।

अकायेसु मामले में अहम योगदान

रवांडा न्यायाधिकरण में नवी पिल्लई ने 'अकायेसु मामले' में युगांतकारी भूमिका निभाई। इस मामले के तहत अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून के इतिहास में पहली बार बलात्कार और यौन हिंसा को नरसंहार और युद्ध अपराध के रूप में मान्यता दी गई।

यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना और गंभीर अपराधों के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम साबित हुआ।

फलस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच का नेतृत्व

नवी पिल्लई वर्तमान में फलस्तीनी क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए गठित संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार उनके कार्यों को दिया गया सम्मान है।