Asian Para Games 2026: निषाद कुमार ने लॉन्ग जंप में जीता गोल्ड, एक हाथ गंवाने के बाद भी नहीं मानी हार

Asian Para Games 2026: निषाद कुमार ने लॉन्ग जंप में जीता गोल्ड, एक हाथ गंवाने के बाद भी नहीं मानी हार
हाइलाइट्स
• निषाद कुमार ने लॉन्ग जंप में जीता गोल्ड
• 7.11 मीटर की छलांग लगाकर रचा इतिहास
• हादसे में गंवाया था दायां हाथ, नहीं मानी हार

पैरा एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट निषाद कुमार ने लॉन्ग जंप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और कामयाबी जोड़ ली है। उन्होंने T47 कैटेगरी की इस स्पर्धा में 7.11 मीटर की छलांग लगाई। खास बात यह है कि निषाद आमतौर पर हाई जंप में हिस्सा लेते हैं और पहली बार लॉन्ग जंप में प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

निषाद कुमार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि खेती के दौरान हुए एक हादसे में उन्होंने अपना दायां हाथ गंवा दिया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खेल की दुनिया में आगे बढ़ते रहे। इससे पहले वह टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भी पदक जीत चुके हैं।

पैरा एशियन गेम्स 2026 में निषाद कुमार ने कैसे जीता गोल्ड?

पैरा एशियन गेम्स के पहले दिन निषाद कुमार ने लंबी कूद में 7.11 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने तीसरे और पांचवें प्रयास में 7.11 मीटर की छलांग लगाई।

इस स्पर्धा में उज्बेकिस्तान के ओमादबेक खासानोव ने 6.99 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक जीता, जबकि श्रीलंका के मोहम्मदु सफरान ने 6.55 मीटर के प्रयास से कांस्य पदक अपने नाम किया।

पहले दिन भारत ने अब तक दो गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता। दिन का पहला स्वर्ण पदक शूटिंग में मोना अग्रवाल ने हासिल किया था, जबकि निषाद कुमार ने दूसरा गोल्ड दिलाया।

निषाद इन खेलों में हाई जंप की T47 स्पर्धा में भी हिस्सा लेंगे। इस श्रेणी में ऊपरी अंगों में दिव्यांगता वाले खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं।

कौन हैं निषाद कुमार?

निषाद कुमार का जन्म 3 अक्टूबर 1999 को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाउं गांव में हुआ था। वह किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता मिस्त्री का काम करते थे और खेती में भी हाथ बंटाते थे। निषाद की पढ़ाई जारी रखने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने मेहनत की।

निषाद ने डीएवी कॉलेज, हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी और फिर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। खेल के क्षेत्र में उन्होंने शुरुआत में वॉलीबॉल में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। बाद में उन्होंने हाई जंप को अपना खेल बनाया और लगातार अभ्यास से आगे बढ़ते गए।

घास काटने वाली मशीन में फंस गया था दायां हाथ

निषाद कुमार के जीवन में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें उनका दायां हाथ चला गया। खेती के दौरान परिवार की मदद करते समय उनका हाथ घास काटने वाली मशीन में फंस गया था।

इस घटना के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। मां से प्रेरणा लेकर उन्होंने खेल में आगे बढ़ने का फैसला किया और शुरुआत में स्टेट लेवल वॉलीबॉल में हिस्सा लिया। इसके बाद 2009 में उन्होंने हाई जंप की ओर रुख किया।

निषाद अपनी ट्रेनिंग के लिए रोजाना एक हाथ से साइकिलिंग भी करते थे। लगातार अभ्यास और मेहनत के जरिए उन्होंने खेल में अपनी जगह बनाई।

हाई जंप में भी भारत के लिए जीत चुके हैं मेडल

निषाद कुमार मुख्य रूप से हाई जंप के एथलीट हैं। उन्होंने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में दो मेडल जीते। पिछले एशियाई पैरा खेलों में भी उन्होंने हाई जंप की T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था।

पहले वह T47 के बजाय 147 कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते थे। इस श्रेणी में हाथ और पैर में दिव्यांगता वाले एथलीट हिस्सा लेते हैं।

अब आइची-नागोया पैरा एशियाई खेलों में लॉन्ग जंप का गोल्ड जीतकर निषाद कुमार ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। हाई जंप में अपनी पहचान बनाने वाले निषाद ने पहली बार लंबी कूद में हिस्सा लिया और 7.11 मीटर के प्रदर्शन के साथ भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।