मानसून सत्र शुरू हुए चार सप्ताह हो चुके हैं लेकिन इस दौरान संसद सुचारी रूप से नहीं चल सकी है। संसद में सिर्फ एक चर्चा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर कुछ ठीक ठाक हो सकी।
बुधवार को भी सदन के भीतर और बाहर हंगामा होता रहा। लोकसभा बैठी तो हंगामें की वजह से कुछ ही देर में स्थगित हो गई। राज्यसभा में कुछ काम हुआ।
चढ़ावा चोरी को लेकर जहां समाजवादी पार्टी बेहद आक्रामक है वहां काँग्रेस पेपर लीक जैसे मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती। सपा को लगता है कि चढ़ावे का मामला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उसे फायदा देगा तो काँग्रेस को लग रहा है कि युवाओं का मुद्दा देशभर में उसे मज़बूत करेगा।
बुधवार को संसद का गतिरोध तोड़ने की कोशिश संसदीय कार्य मंत्री कीरेन रिजिजु ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाक़ात कर की। लेकिन नतीजा फ़िलहाल सामने नहीं आया है।
बुधवार को समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चढ़ावा चोरी सहित अपने कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। दिल्ली में सपा सांसद डिम्पल यादव ने पार्टी की तरफ़ से कमान संभाली तो लखनऊ में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नेतृत्व किया।
विपक्ष के सांसदों ने सरकार के खिलाफ पैदल मार्च निकालकर- जवाबदेही की मांग की। काँग्रेस ने संसद भवन परिसर में हुए प्रदर्शन में शिरकत की जिसमें राहुल गांधी भी शामिल थे। इस प्रदर्शन से इतर राहुल ने बुधवार को विभिन्न राज्यों के उन प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात की और उन्हें मीडिया के सामने पेश किया जिनका आरोप है कि जुलाई छात्र आंदोलन के दौरान उनके साथ बर्बरता की गई या फिर उन्हें उनके आंदोलन में शामिल होने की वजह से टार्गेट किया जा रहा है।
चढ़ावा मुद्दे पर काँग्रेस का कहना है कि राम मंदिर में हुई 'चंढ़ावा चोरी' एक महापाप है, जिसे BJP-RSS के लोगों ने अंजाम दिया है। ये सब जानते हुए भी मोदी सरकार दोषियों को बचाने में लगी है।
जिस तरह का माहौल बना हुआ है उससे तो यही लगता है कि विपक्ष सरकार को चैन नहीं लेने देना चाहता।
काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘हमारी माँग यही है कि प्रधानमंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएँ। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा।’
संसद की कार्यवाही में बाधा को लेकर सरकार चिंतित है। ऐसे में पूरा दारोमदार तीन लोगों पर है जो इस गतिरोध को खत्म करा सकते हैं। इस गतिरोध को खत्म कराने की पहल या तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह की तरफ़ से हो या फिर राहुल गांधी हठ से पीछे हट जाएं।