पोकरण में सभापति की कुर्सी किसकी? कांग्रेस-बीजेपी के बीच मुकाबला, निर्दलीय तय करेंगे समीकरण

पोकरण में सभापति की कुर्सी किसकी? कांग्रेस-बीजेपी के बीच मुकाबला, निर्दलीय तय करेंगे समीकरण

राजस्थान के पोकरण नगर पालिका चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद भी सभापति की कुर्सी का फैसला साफ नहीं हुआ है। 25 वार्ड वाली नगरपालिका में कांग्रेस को 12, बीजेपी को 11 और दो वार्ड में निर्दलीय उम्मीदवारों को जीत मिली है। ऐसे में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।

चुनाव 11 सितंबर को हुए थे और परिणाम 14 सितंबर को घोषित हुआ। अब 21 सितंबर को यह तस्वीर साफ होगी कि पोकरण नगरपालिका की कमान किसके हाथ जाती है।

दो निर्दलीयों पर टिकी कांग्रेस की उम्मीद

कांग्रेस ने 25 में से 22 वार्डों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। बाकी तीन वार्डों में पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दिया था। इनमें से दो निर्दलीय चुनाव जीतने में सफल रहे।

कांग्रेस इन दोनों को अपने समर्थन में मान रही है। यदि दोनों निर्दलीय कांग्रेस के साथ आते हैं, तो पार्टी स्थानीय सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।

वहीं बीजेपी ने सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे 11 वार्डों में जीत मिली। ऐसे में उसके सामने भी बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की चुनौती है।

बीजेपी को कांग्रेस के पार्षदों से उम्मीद

बीजेपी फिलहाल इस मुकाबले में हार मानने को तैयार नहीं है। पार्टी को उम्मीद है कि कांग्रेस के टिकट पर जीते कुछ पार्षद उसका समर्थन कर सकते हैं और इसके जरिए सभापति की कुर्सी बीजेपी के खाते में जा सकती है।

दूसरी ओर, निर्दलीय पार्षदों का रुख भी महत्वपूर्ण है। यदि वे कांग्रेस के साथ नहीं जाते हैं, तो बीजेपी के लिए भी कांग्रेस में तोड़फोड़ किए बिना सभापति बनना मुश्किल होगा।

शाले मोहम्मद और प्रताप पुरी की प्रतिष्ठा दांव पर

पोकरण की स्थानीय राजनीति के इस मुकाबले को कांग्रेस और बीजेपी के दो प्रमुख धर्माचार्यों की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस की ओर से सिंधी मुस्लिम समुदाय के धर्मगुरु और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद हैं।

वहीं बीजेपी की ओर से पोकरण के विधायक और तारातरा मठ के महन्त प्रताप पुरी हैं। दोनों के लिए यह चुनाव साख का विषय बन चुका है।

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमरद्दीन फकीर ने दोनों निर्दलीयों के संपर्क में होने का दावा किया है। वहीं महन्त प्रताप पुरी का दावा है कि विजन और जनता के विश्वास से नगरपालिका पर बीजेपी का कमल खिलेगा।

क्या पोकरण में फिर दिखेगा संतुलन?

स्थानीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि पोकरण की जनता संतुलन पर विश्वास करती है। उनके मुताबिक 2019 की तरह 2026 में भी यह संतुलन कायम रह सकता है।

पोकरण में विधायक बीजेपी से है। ऐसे में उनके अनुसार नगर पालिका की कमान कांग्रेस को मिलने की संभावना वाला समीकरण बनता है। हालांकि अंतिम तस्वीर 21 सितंबर को ही सामने आएगी कि यह संतुलन कायम रहता है या चुनाव के बाद कोई नया समीकरण बनता है।

कांग्रेस में सभापति पद के लिए दो नाम

सभापति पद के लिए फिलहाल कांग्रेस खेमे से कल्पना रंगा का नाम आगे चल रहा है। वह पोखरण नगरपालिका बोर्ड के प्रतिपक्ष नेता रह चुके नारायण रंगा की पुत्रवधू हैं।

इसके अलावा मधुबाला का नाम भी दावेदारों में है। मधुबाला ने आनंदीलाल गुचिया की पुत्रवधू को एक वोट से हराकर नगर पालिका में जगह बनाई है। आनंदीलाल गुचिया पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और हाल तक कांग्रेस के कद्दावर नेता थे, लेकिन कुछ समय पहले ही उन्होंने बीजेपी जॉइन कर लिया था।

अब पोकरण नगरपालिका की सभापति की कुर्सी के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच चल रहे इस समीकरण में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर सभी की नजर है।