हाइलाइट्स
- शरीफ के बयान का संदर्भ देते हुए आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट किया
- कहा, तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर आतंकवाद को सामान्य नहीं किया जा सकता
- भारत ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का किया उल्लेख
- जयशंकर बोले, आतंकवाद और दोस्ती साथ-साथ नहीं चल सकते
S Jaishankar UNGA: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर, सिंधु जल संधि और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर दिए बयान के अगले दिन भारत ने कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को महासभा में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य रखते हुए बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एक ऐसे पक्ष ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जो लगातार आतंकवाद में लिप्त रहा है।
आतंकवाद पर आत्मरक्षा का अधिकार
जयशंकर ने कहा कि महासभा में आतंकवाद को सामान्य बनाने और उसके परिणामों से छूट का दावा करने की कोशिश की गई, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भाव कायम नहीं रह सकते तथा आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अपना रास्ता बदलना होगा।
शरीफ ने उठाया था कश्मीर और पानी का मुद्दा
इससे एक दिन पहले शरीफ ने यूएन में कश्मीर के समाधान की पैरवी की थी और 2025 के संघर्ष का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप को संघर्ष रोकने का श्रेय दिया था। उन्होंने सिंधु नदी के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान के लिए ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानने की चेतावनी दी थी।
जयशंकर ने अपने वक्तव्य में सीमा-पार और राज्य प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए चुनौती बताते हुए आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में वैश्विक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।