सुधीर मिश्रा की ‘Gandhi and My Mother’ में दिखेगा गांधी का अनदेखा दौर

सुधीर मिश्रा की ‘Gandhi and My Mother’ में दिखेगा गांधी का अनदेखा दौर
हाइलाइट
• सुधीर मिश्रा गांधी के जीवन के अनदेखे दौर पर बनाएंगे फिल्म
• मनोज बाजपेयी निभाएंगे महात्मा गांधी का किरदार
• वहीदा रहमान फिल्म में पुतलीबाई की भूमिका में नजर आएंगी
• दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी अहम भूमिकाओं में

Gandhi and My Mother: फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा महात्मा गांधी के जीवन के एक ऐसे दौर को पर्दे पर उतारने जा रहे हैं, जिसे लेकर उनका कहना है कि इसे बहुत कम लोग समझते हैं। अपनी आगामी फिल्म ‘Gandhi and My Mother’ को लेकर सोशल मीडिया X पर लिखे एक पोस्ट में मिश्रा ने कहा कि वह गांधी पर कोई ऐसी फिल्म नहीं बना रहे हैं, जिसमें उन्हें सिर्फ एक महात्मा या संत के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

मिश्रा ने लिखा कि गांधी ऐसे व्यक्ति थे, जो खुद को सवालों से बचाकर नहीं रखते थे। वह अपने आलोचकों की बात इसलिए सुनते थे क्योंकि उन्हें डर रहता था कि कहीं आलोचक सही तो नहीं हैं। निर्देशक के मुताबिक, गांधी ने आलोचनाओं से सीखा और खुद को बदलने का प्रयास किया।

गांधी को संत नहीं, इंसान के रूप में दिखाएंगे

सुधीर मिश्रा ने अपने पोस्ट में कहा कि दर्शक फिल्म में किसी संत को नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति को देखेंगे जो सार्वजनिक जीवन में खुद से जूझ रहा था। उन्होंने गांधी के संघर्ष को उनके विरोधियों के साथ टकराव से ज्यादा अपने ही लोगों और अपने विचारों के साथ संघर्ष के रूप में पेश करने की बात कही।

फिल्म गांधी के जीवन के एक कम चर्चित 21 दिन के दौर पर केंद्रित है। फिल्म की शूटिंग लखनऊ में शुरू हो चुकी है।

मनोज बाजपेयी बने हैं महात्मा गांधी

फिल्म में मनोज बाजपेयी महात्मा गांधी की भूमिका निभा रहे हैं। यह पहली बार है जब बाजपेयी पर्दे पर गांधी का किरदार निभा रहे हैं। वहीं दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान पुतलीबाई, यानी गांधी की मां, की भूमिका में नजर आएंगी।

दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला का रोल

फिल्म में दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नरेंद्र हिरावत की NH Studioz और अनुभव सिन्हा की Benaras Mediaworks कर रही हैं। फिल्म की पहली झलक गांधी जयंती के अवसर पर जारी की गई है।

सुधीर मिश्रा का यह प्रोजेक्ट गांधी के जीवन को पारंपरिक जीवनी की तरह प्रस्तुत करने के बजाय उनके व्यक्तित्व, विचारों और आंतरिक संघर्ष के एक खास दौर पर केंद्रित करने की कोशिश करता है।