Retail Inflation August: खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी सीपीआई आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.95 प्रतिशत हो गई, जो इससे पिछले माह में 5.52 प्रतिशत थी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए सीपीआई महंगाई का अनुमान 5 फीसदी लगाया है। इसमें दूसरी तिमाही के लिए 4.7 फीसदी, तीसरी तिमाही के लिए 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 5.5 फीसदी का अनुमान शामिल है।
आरबीआई (RBI) ने मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच हाल ही में प्रमुख नीतिगत दर रेपो को यथावत रखा था। सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को दो से छह प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है।
खाद्य, ईंधन के दाम भी बढ़े
इस बीच, खाद्य, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं के दाम बढ़ने से थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी।
थोक महंगाई दरें भी तेज
इस बीच, थोक मूल्य आधारित महंगाई दर भी अगस्त में बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई है। यह जुलाई में 9.78 फीसदी थी। थोक महंगाई में यह वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है।
वित्त मंत्री सीतारमण से मिले आरबीआई गवर्नर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।
वित्त मंत्री के कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।’
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कुछ ही सप्ताह पहले भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की रिकॉर्ड जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर्ज की है।
आरबीआई की ब्याज दर तय करने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 5-7 अक्टूबर, 2026 को होनी है। केंद्रीय बैंक ने अगस्त में लगातार चौथी बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।
एसबीआई की एक शोध रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा गया था कि लगातार बाहरी झटकों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और व्यापक मुद्रास्फीति के संकेतों से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक को अगले महीने और फिर दिसंबर में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी चाहिए।