BRICS Summit 2026: 18वें शिखर सम्मेलन से पहले जानिए क्या है BRICS और कैसे बना 11 देशों का समूह

BRICS Summit 2026: 18वें शिखर सम्मेलन से पहले जानिए क्या है BRICS और कैसे बना 11 देशों का समूह

BRICS Summit 2026: दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में BRICS लगातार चर्चा में रहने वाला समूह है। 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत इस साल चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता हिस्सा लेने वाले हैं।

BRICS की शुरुआत चार देशों से हुई थी, लेकिन अब यह 11 सदस्य देशों का समूह बन चुका है। विस्तार के बाद BRICS देशों में दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी रहती है और यह समूह वैश्विक GDP का करीब 39 से 40 प्रतिशत हिस्सा रखता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी इसकी हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत है।

BRICS क्या है और इसका मकसद क्या है?

BRICS दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, विकास, तकनीक, ऊर्जा, वित्त और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाना है।

यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संस्था नहीं है। हालांकि, इसके सदस्य देश कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर मिलकर साझा रणनीति बनाते हैं। BRICS को अक्सर Global South यानी विकासशील और उभरते देशों की मजबूत आवाज के तौर पर भी देखा जाता है।

यह समूह ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करता है।

BRIC नाम की शुरुआत कैसे हुई?

BRICS की शुरुआत किसी औपचारिक बैठक से नहीं हुई थी। साल 2001 में ब्रिटिश इकोनॉमिस्ट जिम ओ’नील (Jim O’Neill) ने एक रिसर्च रिपोर्ट में ब्राजील, रूस, भारत और चीन को भविष्य की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी बताया था।

इन चार देशों के नाम के पहले अक्षरों से BRIC शब्द बनाया गया। उस समय BRIC केवल एक इकोनॉमिक कॉन्सेप्ट था। जिम ओ’नील का मानना था कि आने वाले वर्षों में ये देश ग्लोबल इकोनॉमी में बड़ा हिस्सा रखेंगे और दुनिया की इकोनॉमिक पॉलिसी में इनकी भूमिका बढ़ेगी।

BRIC से BRICS बनने तक

साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यूयॉर्क में BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई। इसके बाद 2009 में रूस के शहर येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।

साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका इस समूह में शामिल हुआ। इसके बाद BRIC का नाम बदलकर BRICS कर दिया गया।

BRICS में 11 देश कैसे शामिल हुए?

करीब 14 साल तक BRICS में सिर्फ 5 देश—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल रहे। इसके बाद साल 2024 में समूह का बड़ा विस्तार हुआ।

1 जनवरी 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को BRICS का सदस्य बनाया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी BRICS का पूर्ण सदस्य बन गया।

इस तरह अब BRICS में कुल 11 सदस्य देश हैं।

BRICS के पार्टनर देश कौन हैं?

पूर्ण सदस्य देशों के अलावा BRICS के 10 पार्टनर देश भी हैं। इन्हें बैठकों और कुछ कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है। ये कई घोषणाओं और डॉक्यूमेंट्स का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण सदस्यों जैसी निर्णय लेने की शक्ति इनके पास नहीं होती।

BRICS के पार्टनर देशों में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

BRICS दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

BRICS का महत्व सिर्फ इसके सदस्य देशों की संख्या से नहीं जुड़ा है। इसकी आर्थिक और जनसंख्या शक्ति भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है।

विस्तार के बाद BRICS देशों में दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी रहती है। समूह ग्लोबल GDP का करीब 39 से 40 प्रतिशत हिस्सा रखता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत है।

इसी वजह से BRICS को दुनिया की प्रभावशाली उभरती आर्थिक ताकतों में गिना जाता है।

G7 और BRICS में क्या अंतर है?

BRICS की तुलना अक्सर G7 से की जाती है। G7 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा जैसे विकसित देश शामिल हैं।

इसके विपरीत BRICS में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। BRICS दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि G7 देशों की आबादी दुनिया की कुल आबादी का 10 प्रतिशत से भी कम है।

BRICS का आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

भारत की BRICS में क्या भूमिका है?

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और शुरुआत से ही इस समूह का हिस्सा रहा है। भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है।

अब 2026 में भारत चौथी बार BRICS की मेजबानी कर रहा है। भारत की अध्यक्षता की थीम है “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.”

इस दौरान भारत सदस्य देशों के बीच संतुलित व्यापार, मजबूत सप्लाई चेन, डिजिटल सहयोग, छोटे कारोबारों के लिए आसान फाइनेंस और टिकाऊ विकास जैसे मुद्दों पर जोर दे रहा है।

2026 का BRICS Summit क्यों है खास?

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन कई मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ पार्टनर देशों और अन्य आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।

सम्मेलन में वैश्विक शासन (Global Governance), ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), खाद्य सुरक्षा (Food Security), व्यापार (Trade), निवेश (Investment), तकनीक (Technology), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और क्षेत्रीय संघर्ष (Regional Conflicts) जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

BRICS के सामने क्या चुनौतियां हैं?

BRICS का विस्तार हुआ है तो इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। समूह में अब ऐसे देश शामिल हैं जिनके आपसी हित कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं।

मिडिल ईस्ट के देशों के बीच तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते जैसे मुद्दों पर सभी सदस्यों के विचार हमेशा एक जैसे नहीं होते।

भारत के सामने भी संतुलन बनाए रखने की चुनौती है, क्योंकि उसके मजबूत संबंध BRICS देशों के साथ-साथ अमेरिका और खाड़ी देशों से भी हैं। ऐसे में भारत की कोशिश BRICS को आर्थिक सहयोग का मंच बनाए रखने की है।