Red Sea Crisis: हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमले की मांग, ट्रंप ने क्यों किया इनकार?

Red Sea Crisis: हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमले की मांग, ट्रंप ने क्यों किया इनकार?

Saudi Under Attack: लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान यानी MBS ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बात की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी हमले की मांग की। हालांकि, ट्रंप ने यमन में बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताने के बावजूद अमेरिकी हमले से इनकार कर दिया।

मोचा पर कब्जे के बाद बढ़ी सऊदी की चिंता

हूती विद्रोहियों ने कुछ वक्त पहले मोचा शहर पर कब्जा कर लिया और तेजी से दक्षिण की ओर बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, सऊदी समर्थित यमनी बल पीछे हट रहे थे। इसी स्थिति के बीच दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से Axios की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें MBS और ट्रंप के बीच बातचीत की जानकारी दी गई।

पहली बातचीत के कुछ घंटे बाद MBS ने अमेरिकी राष्ट्रपति से दोबारा बात की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी स्ट्राइक की मांग रखी। वॉशिंगटन ने सीधे हमला करने के बजाय सऊदी अरब को हूतियों से जुड़ी खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में गैर-गतिशील सहायता दे रहे हैं। इससे पहले पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का पैक्ट के बाद भी सऊदी की मदद करने से इनकार किया था।

बाब अल-मंडेब तक पहुंच से क्यों बढ़ी चिंता?

हूतियों की बढ़त अब केवल यमन के संघर्ष तक सीमित नहीं मानी जा रही है। रणनीतिक तटीय इलाकों की तरफ उनके बढ़ने से वे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के और करीब पहुंच रहे हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है।

हूतियों की बढ़त के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया। स्थिति की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ती है कि ईरान पहले से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर रहा है।

ऐसे में अगर हूतियों का बाब अल-मंडेब पर कब्जा हो जाता है, तो ईरान के पास अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बनाने का एक और बड़ा जरिया होगा।

सऊदी अरब पहुंचे अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर

मामले से जुड़े दो सोर्स के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने वहां हालात पर तुरंत चर्चा के लिए अहम बैठकें कीं।

वहीं, वाशिंगटन स्थित सऊदी एंबेसी और व्हाइट हाउस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।

ट्रंप सीधे युद्ध में क्यों नहीं उतरना चाहते?

अमेरिका फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल होने से बचना चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन की प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है।

वहीं, यमन के व्यापक संघर्ष को संभालने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर छोड़ने की कोशिश की जा रही है। सऊदी अरब हूतियों की बढ़ती ताकत रोकने के लिए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप चाहता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन एक और मोर्चा खोलने से बच रहा है।

इसी वजह से अमेरिका फिलहाल सीधे मिसाइल हमले के बजाय खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग तक अपनी भूमिका सीमित रखने की कोशिश कर रहा है।