हाइलाइट्स :
• आयोग ने कहा, सदस्यों के सुझाव चुनाव प्रक्रिया सुधारने का हिस्सा
• पिछले एक साल में करीब 40 नई पहल और कई चुनावी सुधार किए
• ईसीआईनेट समेत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू
• एसआईआर समेत मतदाता सूची पुनरीक्षण के फैसले सर्वसम्मति से लेने का दावा
निर्वाचन आयोग ने एक समाचार पत्र में संगठन के भीतर SIR सहित कुछ मुद्दों को लेकर कथित मतभेद के खबरों पर कहा कि आयोग के सदस्यों के बीच विचार, सुझाव और टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
आयोग ने बुधवार को जारी प्रेस नोट में स्पष्ट किया कि मसौदा स्तर पर सदस्यों की ओर से उठाए गए सवाल और दिए गए सुझाव चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने तथा मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से होते हैं। आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश संविधान, कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप जारी किए जाते हैं।
आयोग ने कहा कि कुछ आंतरिक टिप्पणियों और नोट्स को अलग से सामने रखने के बजाय पिछले एक वर्ष में हुए फैसलों और पहलों के व्यापक संदर्भ को भी देखा जाना चाहिए। उसके अनुसार हाल के महीनों में करीब 40 नई पहल शुरू की गईं और कई चुनावी सुधार किए गए। इनमें देशभर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, विशेष गहन पुनरीक्षण SIR समेत अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। आयोग ने कहा कि पिछले एक वर्ष में पूर्ण आयोग के स्तर पर लिए गए ये फैसले सर्वसम्मत रहे हैं।
आयोग ने बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में हाल में कराए गए प्रमुख चुनावों का भी उल्लेख किया। आयोग के मुताबिक इन चुनावों में व्यापक प्रशासनिक और परिचालन व्यवस्था के साथ अनेक अनुमोदन और निर्देश जारी किए गए।
आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट की सुरक्षा का भी उल्लेख किया। उसने कहा कि डिजिटल प्रणालियां अनधिकृत छेड़छाड़ और हेरफेर रोकने के लिए कड़े डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती हैं। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता पंजीकरण तथा नाम हटाने के संबंध में कानून के तहत अधिकार प्राप्त हैं।
आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।