हाइलाइट्स :
• 18 सूत्री मांगों पर आज बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक
• छात्रों ने स्वतंत्र जांच समिति की मांग की
• 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट की मांग
• 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट की मांग
• मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही मामले की जांच
आईआईटी बॉम्बे में 22 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या के बाद छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच संस्थान ने छात्रों की ओर से सौंपे गए 18 सूत्री मांगपत्र पर चर्चा के लिए सोमवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की विशेष बैठक बुलाई है। बैठक के बाद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे छात्रों के साथ टाउन हॉल बैठक भी करेंगे। रविवार को छात्रों के साथ हुई लंबी चर्चा के दौरान केदारे ने छात्रों के मांगपत्र को स्वीकार किया और उस पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया। सोमवार को संस्थान में सभी लेक्चर रद्द रहेंगे।
18 सूत्री मांगपत्र में क्या चाहते हैं छात्र?
छात्रों ने अपने मांगपत्र में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई, छात्र की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच और संस्थान प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने की मांग की है। इसके अलावा छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं में सुधार से जुड़े मुद्दे भी मांगपत्र में शामिल हैं।
छात्रों की ओर से रखी गई प्रमुख मांगों में प्रोफेसर सूर्यानारायण दूल्ला को तत्काल निलंबित करना और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटाना शामिल है।
छात्रों ने छात्र के बारे में लिंक्डइन पर साझा की गई पोस्ट को उसकी "बदनामी" बताया है। इसके लिए आईआईटी बॉम्बे से सार्वजनिक माफी की मांग भी की गई है।
ओपन हाउस और मांगों की समयसीमा की मांग
मांगपत्र में निदेशक, डीन एसए, डीन एपी और मृत छात्र के विभागाध्यक्ष के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की गई है। छात्र इसमें सीधे अपने सवाल और चिंताएं रखने चाहते हैं। छात्रों ने इस बैठक को 22 सितंबर से पहले कराने की मांग की है।
इसके साथ ही छात्रों ने मांगों के क्रियान्वयन को लेकर जवाबदेही तय करने की बात कही है। मांगों को एक महीने के भीतर लागू नहीं किए जाने पर निदेशक, डीन एपी और डीन एसए के इस्तीफे की मांग की गई है। छात्रों ने मांगों की प्रगति पर हर सप्ताह अपडेट देने की भी मांग रखी है।
स्वतंत्र जांच समिति और रिपोर्ट की मांग
छात्रों ने प्रोफेसरों, छात्र प्रतिनिधियों, बाहरी सदस्यों और छात्र प्रतिनिधियों की ओर से सुझाए गए सदस्यों वाली स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है। समिति छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों, आपातकालीन प्रतिक्रिया और अस्पताल में मिली सहायता समेत अन्य पहलुओं की जांच करेगी।
मांगपत्र में 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट जारी करने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा हाल के महीनों में आईआईटी बॉम्बे में अपने प्रियजनों को खोने वाले चार लोगों के परिवारों को उचित और जल्द वित्तीय सहायता देने की मांग की गई है। छात्रों ने संस्थान की ओर से लगातार सहयोग देने की भी मांग की है।
मुंबई क्राइम ब्रांच कर रही छात्र की मौत की जांच
मुंबई क्राइम ब्रांच ने आईआईटी बॉम्बे के 22 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या की जांच अपने हाथ में ले ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइम ब्रांच प्रोफेसर सूर्यानारायण दूल्ला और अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है। मामले में प्रोफेसर दूल्ला को आरोपी बनाया गया है।
पवई पुलिस ने छात्र के माता-पिता की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
परीक्षा के बाद छात्र हॉस्टल में मृत मिला था
छात्र बीती 18 सितंबर की शाम अपने हॉस्टल के कमरे में मृत मिला था। इससे कुछ घंटे पहले उसे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था।
आईआईटी बॉम्बे ने कहा था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र की तस्वीर चैटजीपीटी पर अपलोड कर जवाब मांगे थे। हालांकि, संस्थान के अनुसार, उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
संस्थान ने यह भी कहा था कि परीक्षा में मौजूद शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की थी। उसे भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना से उसके शैक्षणिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर का समर्थन किया
आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यानारायण दूल्ला के प्रति समर्थन जताया है। फोरम के अनुसार, परीक्षा के दौरान स्मार्टफोन के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की सूचना देते समय प्रोफेसर संस्थान की तय प्रक्रिया का पालन कर रहे थे।
फोरम ने कहा कि दूल्ला मिड-सेमेस्टर परीक्षा की निगरानी कर रहे थे और उन्होंने कथित अकादमिक अनियमितता की जानकारी आगे की कार्रवाई के लिए संस्थान के अधिकारियों को दी थी।