• बुमथांग स्थित राष्ट्रीय पशु प्रजनन केंद्र में हुआ हस्तांतरण
• डेयरी पशु प्रजनन कार्यक्रम से बढ़ेगी दूध उत्पादकता
• केंद्र की योजना से 40 हजार किसानों को मिलेगा लाभ
• जर्सी नस्ल दूध में वसा और प्रोटीन के लिए प्रसिद्ध
भारत ने भूटान के डेयरी पशु प्रजनन कार्यक्रम के लिए 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें सौंपी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भूटान के बुमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के दौरे के दौरान इन गायों को हस्तांतरित किया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया X पर साझा पोस्ट में बताया कि इस पहल का मकसद दूध की उत्पादकता बढ़ाने के साथ स्थानीय किसानों को समर्थन देना है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र के प्रजनन कार्यक्रम से करीब 40 हजार किसानों को लाभ मिलेगा।
दूध उत्पादन के लिए जर्सी नस्ल की खासियत
जर्सी गाय मूल रूप से जर्सी द्वीप की नस्ल है और दुनिया की प्रमुख डेयरी नस्लों में शामिल है। इसका शरीर होल्स्टीन फ्रिजियन जैसी बड़ी नस्लों की तुलना में सामान्यतः छोटा होता है।
इस नस्ल के दूध में वसा और प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत अच्छी होती है। इसी वजह से इसका डेयरी क्षेत्र में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। जर्सी गाय की जलवायु के अनुसार ढलने की क्षमता और अपेक्षाकृत कम शरीर भार भी अलग-अलग परिस्थितियों में इसके पालन को उपयोगी बनाते हैं।
डेयरी पशु प्रजनन कार्यक्रम में होगा इस्तेमाल
भारत की ओर से भूटान को दी गई इन गायों का इस्तेमाल डेयरी पशु प्रजनन कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसका लक्ष्य बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं की संख्या बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन की क्षमता को मजबूत करना है।
ऐसे प्रजनन कार्यक्रमों के जरिए आने वाली पीढ़ियों में दुग्ध उत्पादन से जुड़े वांछित गुण विकसित करने में मदद मिल सकती है। जयशंकर ने नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर के दौरे के दौरान वहां चल रहे कार्यक्रम की जानकारी भी ली।
भारत की ओर से जर्सी गायों की यह आपूर्ति कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आई है।