- रात 11:51 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा NVS-03
- NavIC प्रणाली में शामिल होगा नया L1 सिग्नल
- सैटेलाइट में लगाई गई है स्वदेशी परमाणु घड़ी
- भारत के 1500 किलोमीटर से आगे तक मिलेगा कवरेज
- ISRO के GSLV रॉकेट की यह 20वीं उड़ान होगी
|
ISRO NVS-03 Satellite Launch: भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। इसरो 30 अक्टूबर की रात NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
सैटेलाइट का प्रक्षेपण रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। इस मिशन के सफल होने से भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन व्यवस्था की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही आम नागरिकों से लेकर सामरिक और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों तक में इसके इस्तेमाल को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
करीब 2,250 किलोग्राम वजनी NVS-03 सैटेलाइट को GSLV रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन भारत की नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन (NavIC) प्रणाली के विस्तार और उसे मजबूत बनाने की योजना का हिस्सा है। इसरो के मुताबिक, इस मिशन में कई ऐसी तकनीकी विशेषताएं शामिल की गई हैं, जो देश की नेविगेशन सेवाओं को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने में मदद करेंगी।
स्वदेशी परमाणु घड़ी से मिलेगी सटीक जानकारी
NVS-03 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसमें लगाई गई स्वदेशी परमाणु घड़ी शामिल है। सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली में सटीक समय का विशेष महत्व होता है। इसी समय के आधार पर किसी स्थान की स्थिति और दूरी का निर्धारण किया जाता है। परमाणु घड़ी की मदद से समय संबंधी गणनाओं की सटीकता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
इस सैटेलाइट में स्वदेशी तकनीक से विकसित परमाणु घड़ी का इस्तेमाल भारत की अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी दर्शाता है। इससे नेविगेशन सेवाओं के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
NavIC में जुड़ेगा L1 सिग्नल
NVS-03 में L1 सिग्नल की सुविधा भी शामिल की गई है। यह इस मिशन का एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू है। L1 सिग्नल जुड़ने से NavIC प्रणाली की विभिन्न उपभोक्ता उपकरणों के साथ अनुकूलता बढ़ेगी। इससे स्मार्टफोन और अन्य नेविगेशन आधारित उपकरणों में इस स्वदेशी प्रणाली का इस्तेमाल अधिक सुविधाजनक हो सकेगा।
इसका लाभ नागरिक उपयोग के साथ-साथ परिवहन, आपदा प्रबंधन, समुद्री गतिविधियों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी मिल सकता है। बेहतर सिग्नल उपलब्धता से NavIC को अधिक व्यापक स्तर पर अपनाने में मदद मिलेगी।
भारत के बाहर 1500 किलोमीटर तक कवरेज
NavIC भारत की अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट प्रणाली है। इसका उद्देश्य भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में सटीक पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस प्रणाली के तहत भारत के साथ देश की सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक के क्षेत्र को कवर करने की क्षमता निर्धारित की गई है।
NVS-03 के शामिल होने से इस व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। इससे आम लोगों के लिए स्थान की जानकारी प्राप्त करने, रास्तों का पता लगाने और नेविगेशन आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करने में सहायता मिलेगी। वहीं, सुरक्षा और सामरिक जरूरतों के लिहाज से भी यह मिशन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस साल पांच मिशनों की योजना
NVS-03 का प्रक्षेपण इसरो की इस साल की पांच मिशनों वाली योजना का हिस्सा है। इन मिशनों का एक प्रमुख उद्देश्य NavIC प्रणाली में मौजूद चार परिचालन सैटेलाइट की क्षमता को बहाल करने और व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करना है। भारत के लिए अपनी स्वतंत्र नेविगेशन प्रणाली का प्रभावी बने रहना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए दूसरे देशों की नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम होती है।
तिरुपति मंदिर में दर्शन करने पहुंचे इसरो प्रमुख
मिशन से पहले इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने तिरुपति मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। यह प्रक्षेपण इसरो के GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान भी होगा। इस लिहाज से यह मिशन संगठन के लिए तकनीकी और परिचालन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
इसरो के यूट्यूब चैनल पर प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण रात 11 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा। इच्छुक लोग लॉन्च की तैयारियों और प्रक्षेपण की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन देख सकेंगे। रात 11:51 बजे होने वाला यह प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष और नेविगेशन क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि साबित हो सकता है।