वाराणसी शिक्षक MLC सीट पर लाल बिहारी यादव की दूसरी बार जीत

वाराणसी शिक्षक MLC सीट पर लाल बिहारी यादव की दूसरी बार जीत
  • लाल बिहारी यादव ने वाराणसी शिक्षक MLC सीट जीती
  • भाजपा के डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5015 मतों से हराया
  • लाल बिहारी यादव को कुल 11612 वोट मिले
  • दूसरी वरीयता के मतों की गिनती से तय हुआ परिणाम
  • सपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ मनाया जश्न

Lal Bihari Yadav Varanasi MLC Election: विधान परिषद की वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव Lal Bihari Yadav ने दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंनें भाजपा के निकटतम प्रतिद्वंद्वी डा. प्रमोद कुमार मिश्रा Dr. Pramod Kumar Mishra को 5015 मतों से हराया। डा. प्रमोद मिश्रा को कुल 6597 मत मिले। जबकि लाल बिहारी को 11612 मत प्राप्त हुए। सपा ने इस जीत का जमकर जश्न मनाया। जमकर नारेबाजी की तो वहीं ढोल नगाड़े पर जमकर झूमे और मिठाईयां बांटी।देर रात तक एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।

शिक्षक एमएलसी के प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती में सपा के लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले तो वहीं भाजपा के डा. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6060 मत प्राप्त हुए। सपा प्रत्याशी को 514 वोट और मिल गए होते तो प्रथम वरीयता की गिनती में ही जीत पक्की होती। कुल वैध मतों के पचास प्रतिशत यानी 11,472 वोट न होने के कारण द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू हुई। इसके बाद आठ चक्र की गिनती हुई। क्रमवार कम वोटों पाने वाले प्रत्याशियों के द्वितीय वरीयता के मत में सपा की झोली में 654 मत तो भाजपा के 537 वोट ही आए। चेतनारायण को कुल 3471 वोट प्राप्त हुए।

प्रथम वरीयता में वोटों की यूं रही स्थिति

लाल बिहारी यादव – 10, 958
डा. प्रमोद कुमार मिश्र- 6060

चेत नारायण सिंह – 3111
अवधेश सिंह -108

श्रृतिका दुबे -450
डा. जितेंद्र कुमार सिंह पटेल – 1088

धर्मेंद्र कुमार यादव -182
डा. फरीद अंसारी – 152

सुधांशु शेख त्रिपाठी – 533
संजय राय प्रियदर्शी -301

–
वैध मतों की संख्या – 22943

प्रतिक्षेपित यानी निरस्त मतों की संख्या – 1441

द्वितीय वरीयता वोटों के बाद

सपा के लाल बिहारी यादव -11612

भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्र – 6597
निर्दल प्रत्याशी चेतनारायण सिंह- 3471

पार्टी बदली पर डा. मिश्रा को नहीं मिला फायदा

डा. प्रमोद मिश्रा 2020 में शिक्षक नेता के तौर पर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे तो 6830 वोट मिले थे। चुनाव से ठीक पूर्व उन्होंने भाजपा का दामन थामा, उम्मीद थी कि वोट ज्यादा मिलेंगे और जीत पक्की होगी। लेकिन इसका फायदा नहीं मिला। प्रथम वरीयता के वोटों की बात करें तो डा. मिश्र की झोली में सिर्फ 6060 वोट ही आए यानी अपना पुराना वोट भी सहेज नहीं पाए। सपा इस चुनाव को लेकर पहले से गंभीर थी।