Dussehra: मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की 10 बड़ी बातें, Gen-Z और OTT पर जताई चिंता

Dussehra: मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की 10 बड़ी बातें, Gen-Z और OTT पर जताई चिंता
हाइलाइट्स
•  जेन-जी और OTT पर मोहन भागवत की चिंता
•  पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने पर जोर
•  नशे को बताया गंभीर राष्ट्रीय समस्या
•  कैप्टन स्मित मच्छार की सराहना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत नागपुर में शताब्दी वर्ष के श्री विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत स्वयंसेवकों के पथ संचलन से हुई। अपने संबोधन में भागवत ने पश्चिमी प्रभाव, नई पीढ़ी की चिंताओं, नशे, तकनीक, संतुलित विकास और सामाजिक एकता जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने पर जोर दिया और संस्कारों से प्रेरित होकर काम करने के लिए कैप्टन स्मित मच्छार की सराहना की।

पश्चिमी प्रभाव और राजनीतिक आंदोलनों पर क्या बोले भागवत?

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से एक आंधी चली है, जिससे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने फ्रांस और अल्बानिया का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया वहां हो रही घटनाओं को देख रही है और भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में गलत आचरण नहीं होना चाहिए।

भागवत ने यह भी आगाह किया कि केवल सत्ता बदलने के उद्देश्य से होने वाले आंदोलन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करते। उनके मुताबिक, ऐसे विरोध-प्रदर्शन राजनीतिक हितों का माध्यम बन सकते हैं और समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं।

पंच परिवर्तन को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर

RSS प्रमुख ने पंच परिवर्तन की पांच पहलों का उल्लेख किया। इनमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों और स्तरों पर इन पहलों का स्वागत हुआ है। दूसरे देशों में भी इनकी जरूरत महसूस की गई है। भागवत के अनुसार, पंच परिवर्तन केवल एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जीवन में व्यवहार और आचरण को बदलने की शैली है।

जेन-जी और OTT प्लेटफॉर्म को लेकर जताई चिंता

नई पीढ़ी पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि युवा विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली जानकारी को सही-गलत का विवेक किए बिना ग्रहण कर लेते हैं। उन्होंने बताया कि इसके दुष्परिणाम सामने आने के बाद कई देशों ने कुछ अनुशासन और प्रतिबंध लागू किए हैं।

भागवत ने कहा कि भारत में भी, खास तौर पर OTT प्लेटफॉर्म को लेकर, ऐसी जरूरत महसूस की जा रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस विषय पर विचार करने की बात कही।

नशे को बताया गंभीर राष्ट्रीय समस्या

डॉ. भागवत ने कहा कि विवेक के अभाव में दुनिया भर में नई पीढ़ी नशीली दवाओं की आदत का शिकार हो रही है। उन्होंने नशे को गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए शासन-प्रशासन और समाज को समय रहते प्रयास शुरू करने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान अभिभावक पीढ़ी को नई पीढ़ी में सही और गलत का विवेक विकसित करना होगा।

तकनीक के साथ संतुलित विकास भी जरूरी

भागवत ने विज्ञान और तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि इनकी प्रगति लोगों को भौतिक सुख-सुविधाएं देने के साथ ज्ञान और तर्क के आधार पर व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक केवल एक साधन है।

उनके मुताबिक, अगर विकास का नजरिया केवल उपभोगवादी या जड़वादी होगा, तो सुख-सुविधाओं के साथ उससे बड़ी हानि भी उठानी पड़ सकती है।

नेपाल की त्रासदी का उदाहरण दिया

संतुलित विकास की जरूरत समझाते हुए भागवत ने नेपाल की भयंकर त्रासदी का उदाहरण दिया, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा कि इसके मूल में कहीं न कहीं भारत, तिब्बत, भूटान और चीन जैसे देशों से गुजरने वाले पूरे हिमालय क्षेत्र में हुए एकांगी विकास का परिणाम भी है।

उन्होंने समग्र और संतुलित विकास की दृष्टि विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समाज में धैर्य और जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील

भागवत ने कहा कि समाज में अच्छा माहौल बनाने और उसे बनाए रखने के लिए सभी को धैर्य और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने लोगों से सोच-समझकर काम करने और एक-दूसरे का ध्यान रखने की अपील की।

उन्होंने आम नागरिकों के रोजमर्रा के व्यवहार में भी सावधानी बरतने की जरूरत बताई।

कैप्टन स्मित मच्छार की सराहना की

अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने कैप्टन स्मित मच्छार के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कारों से प्रेरित होकर स्मित मच्छार ने हाल ही में जो किया, वह स्वाभाविक था।

भागवत के अनुसार, उस परिस्थिति में क्या करना है, इसके लिए कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। परीक्षा की घड़ी में उनके भीतर की परंपराएं और संस्कार सामने आ गए।

राज नारायण बसु और स्वदेशी के महत्व का उल्लेख

भागवत ने बंग भूमि के स्वर्गीय राज नारायण बसु का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मेलों के माध्यम से समाज में स्व के आत्मबोध को जागृत करने वाले 'हिंदू मेला' के प्रेरक और प्रवर्तक राज नारायण बसु के जन्म का 200वां वर्ष चल रहा है।

उन्होंने कहा कि समाज को अपनी विस्मृति दूर कर उस तत्व को स्पष्ट रूप से समझना और स्वीकार करना होगा। इसके अनुरूप जीवन के सभी आयामों में गुणवत्ता विकसित करने की जरूरत है। भागवत ने कहा कि देश की स्वाधीनता के लिए जितनी तपस्या और समर्पण हुआ, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब उससे भी अधिक प्रयास की आवश्यकता होगी।

स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और सामाजिक एकता पर जोर

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में भागवत ने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना पूरा जीवन भारत को आजाद कराने में लगा दिया। उनके संघर्ष से बनी शक्ति के कारण ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज बहुरंगी है और दिखने में एक जैसा लगता है। भागवत ने समाज के भीतर मौजूद एकता पर ध्यान देने की जरूरत बताई।