उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम् गाने पर बुरी तरह तिलमिलाई कांग्रेस, आखिर माजरा क्या है?

उमर अब्दुल्ला के वंदे मातरम् गाने पर बुरी तरह तिलमिलाई कांग्रेस, आखिर माजरा क्या है?

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का वंदे मातरम् गाते हुए वीडियो सामने आया है। श्रीनगर में 7 सितंबर को फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ। करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चले इस गायन के दौरान उमर अब्दुल्ला खड़े रहे। कार्यक्रम में उनके पिता और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद थे।

वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण उस बहुलतावादी और समावेशी सोच के अनुरूप नहीं है, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए अपनाया था।

कांग्रेस ने वंदे मातरम् के पूरे संस्करण पर क्या कहा?

केसी वेणुगोपाल ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और जे.बी. कृपलानी के विचारों और फैसलों का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगियों से सम्मानपूर्वक आग्रह करती है कि वे स्वतंत्रता सेनानियों की समझ और फैसले का सम्मान करें। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् के उसी संस्करण को गाया जाना चाहिए, जिसे उस समय के नेताओं ने अपनाया था।

वेणुगोपाल के मुताबिक, उस संस्करण को इसलिए चुना गया था ताकि गीत को सांप्रदायिक रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए यही रास्ता भारत की धर्मनिरपेक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाली पहचान को बनाए रखने का है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बन गई है।

बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के सहयोगी ही उसके रुख से सहमत नहीं दिख रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के सहयोगियों को वंदे मातरम् के पूरे गीत से परेशानी नहीं है, तो कांग्रेस इस मुद्दे पर इतना कड़ा रुख क्यों अपना रही है।

सोनिया गांधी के वीडियो के बाद फिर चर्चा में आया मुद्दा

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का मौजूदा रुख 15 अगस्त के उस वीडियो के बाद चर्चा में आया था, जिसमें कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् बजाए जाने के दौरान सोनिया गांधी अंतरा गाए जाने के बाद इसे रोकने का इशारा करती नजर आई थीं।

वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस से माफी की मांग भी उठी। देश के कुछ हिस्सों में इस मामले को लेकर केस दर्ज होने की खबरें भी सामने आईं। कांग्रेस ने इस पर अलग-अलग सफाई दी, लेकिन पार्टी अपने रुख पर कायम रही।

बाद में कांग्रेस ने साफ कर दिया कि पार्टी वंदे मातरम् के सिर्फ दो अंतरे ही गाएगी। पार्टी की कार्यकारिणी में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया और 18 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया।

उमर अब्दुल्ला का रुख पहले से रहा है स्पष्ट

उमर अब्दुल्ला का वंदे मातरम् को लेकर रुख पहले से ही साफ रहा है। 15 अगस्त को सोनिया गांधी के वीडियो को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने वंदे मातरम् को पूरा गाने की पैरवी की थी।

ऐसे में 7 सितंबर को श्रीनगर के फिल्म फेस्टिवल में पूरे वंदे मातरम् के दौरान उनका खड़े रहना कोई अचानक बदला हुआ रुख नहीं है। वह पहले भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं।

वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर बीजेपी ने भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है।

कांग्रेस के सहयोगियों की राय अलग-अलग

वंदे मातरम् के मुद्दे पर कांग्रेस के सहयोगियों की राय एक जैसी नहीं है। विपक्षी गठबंधन की कई पार्टियां कांग्रेस के रुख से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।

किस पार्टी का क्या रुख है?

  • कांग्रेस का कहना है कि पार्टी केवल दो अंतरे गाएगी।
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पूरा गीत गाने के पक्ष में हैं।
  • टीएमसी ने पूरे अंतरे अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है, लेकिन कांग्रेस की तरह पूरे गीत को लेकर कड़ा विरोध नहीं जताया है।
  • समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर पूरे गीत के विरोध में नहीं है।
  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT ने कांग्रेस की लाइन का समर्थन नहीं किया है।
  • डीएमके पूरे छह अंतरे अनिवार्य किए जाने का विरोध कर रही है।
  • आरजेडी की पार्टी लाइन अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
  • शरद पवार की NCP-SP ने भी कांग्रेस की तरह वंदे मातरम् का विरोध नहीं जताया है।

क्या वंदे मातरम् पर कांग्रेस अलग-थलग पड़ रही है?

वंदे मातरम् को लेकर अब कांग्रेस के सामने यही बड़ा सवाल है। एक तरफ पार्टी ने सिर्फ दो अंतरे गाने का फैसला किया है, वहीं दूसरी तरफ उसके कई सहयोगी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़े नजर नहीं आ रहे।

उमर अब्दुल्ला का पूरा वंदे मातरम् गाना कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि वह विपक्षी गठबंधन के ही एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं।

कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर रही है, लेकिन उसके सहयोगियों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वंदे मातरम् पर कड़ा रुख अपनाकर कांग्रेस राजनीतिक तौर पर अकेली पड़ रही है?