"एक राष्ट्र, एक चुनाव" विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने लखनऊ में दूसरे दिन मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानमंडल के पीठासीन अधिकारियों, विपक्ष के नेताओं तथा कुछ निर्वाचित सदस्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया।
समिति ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों से भी भेंट कर प्रस्तावित व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
बैठक के दौरान प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों, विधायी प्रक्रिया, संघवाद जैसे संवैधानिक सिद्धांतों, भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियों, केंद्र-राज्य संबंधों पर संभावित प्रभाव तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समिति ने भारतीय जनता पार्टी BJP, समाजवादी पार्टी SP, बहुजन समाज पार्टी BSP, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस CONG, राष्ट्रीय लोकदल RLD, आम आदमी पार्टी AAP, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी CPIM तथा अपना दल (एस) के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियों के दृष्टिकोण एवं विचार समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।
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समिति ने इसके उपरांत विभिन्न व्यापार एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया।प्रतिनिधियों ने समिति को बार-बार होने वाले चुनावों तथा उसके परिणामस्वरूप लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्यों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराया। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों, उद्योग, अर्थव्यवस्था तथा समाज के विभिन्न वर्गों पर इसके प्रभावों के संबंध में भी अपने विचार साझा किए।