- पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त जारी
- करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में पहुंचे 18 हजार करोड़ रुपये
- दुनिया में 3000 की यूरिया बोरी भारत में 300 रुपये से कम
- सरकार ने खाद सब्सिडी पर खर्च किए 16 लाख करोड़ रुपये
- पशुपालन, डेयरी और कृषि क्षेत्र की योजनाओं का भी जिक्र
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PM Modi Farmers Fertilizer Subsidy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ईरान और खाड़ी देशों के आसपास चल रहे युद्ध के कारण दुनिया में खाद की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन भारत सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। किसानों को खाद की कमी भी नहीं होने दी गई। दुनिया में यूरिया की एक बोरी की कीमत 3000 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि भारत में किसानों को यही बोरी 300 रुपये से भी कम में उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह दुनिया में डीएपी खाद की कीमत 5000 रुपये से अधिक हो गई है, लेकिन भारतीय किसानों को यह 1350 रुपये में मिल रही है। प्रधानमंत्री शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा में आयोजित किसान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की नई किस्त भेजे जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश के करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचाई गई है। गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ मिला है। वहीं बनासकांठा के लाखों किसान परिवारों के खातों में करीब 50 करोड़ रुपये पहुंचे हैं।
किसानों के कल्याण को सरकार ने दी प्राथमिकता
पीएम मोदी ने कहा कि किसान विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक हैं। सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण और उन्हें सशक्त बनाने को प्राथमिकता दी है। वर्ष 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट पांच गुना से अधिक हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में सरकार की नीतियों और पांच प्रमुख योजनाओं के माध्यम से किसानों को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिला है या उनकी बचत हुई है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, पीएम किसान सम्मान निधि के तहत करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये सीधे छोटे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। खाद पर सब्सिडी के लिए सरकार ने लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। पिछले 12 वर्षों में गेहूं और धान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं। वहीं पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल नुकसान के मुआवजे के रूप में दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा मिल चुके हैं।
सोलर पंप से किसानों की बचत
प्रधानमंत्री ने पीएम कुसुम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत अब तक करीब 12 लाख सोलर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं। इससे बिजली और डीजल पर किसानों की निर्भरता कम हुई है। उनके मुताबिक, इन पंपों के इस्तेमाल से किसानों को 80 करोड़ लीटर से अधिक डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे उनकी लागत में बचत हुई है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर भी जोर
पीएम मोदी ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार पशुओं की नस्ल सुधारने, टीकाकरण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। बनासकांठा में नया रिसर्च सेंटर राष्ट्रीय गोकुल मिशन को मजबूती देगा। यहां गिर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों तथा मेहसाणा, मुर्रा और जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों के संरक्षण और सुधार पर काम होगा।
उन्होंने बताया कि देश में पशुओं को खुरपका और मुंहपका बीमारी से बचाने के लिए अब तक करीब 150 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। वर्ष 2013-14 में गाय और भैंस से औसतन प्रतिदिन पांच लीटर से कम दूध मिलता था, जो अब बढ़कर करीब आठ लीटर हो गया है। भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। बनासकांठा में दो बायो-सीएनजी प्लांट का शिलान्यास भी किया गया है, जिससे गोबर और कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
बनासकांठा के विकास का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि नर्मदा के पानी और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों ने बनासकांठा की तस्वीर बदल दी है। यहां का आलू विश्व प्रसिद्ध है। आलू किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए फ्रेंच फ्राइज बनाने वाले आलू प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई गई है। इसके अलावा फल और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि गुजरात को अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस और मेहसाणा-बेचारजी-साबरमती मेमू ट्रेन की नई रेल सेवाएं मिली हैं। अहमदाबाद मेट्रो का विस्तार होगा और गिफ्ट सिटी को एयरपोर्ट से जोड़ने वाली मेट्रो परियोजना पर भी काम आगे बढ़ेगा। अहमदाबाद-मेहसाणा हाईवे को चार लेन से आठ लेन करने की योजना है। गुजरात में चार हजार से अधिक आधुनिक आंगनबाड़ियों का भी शुभारंभ किया जा रहा है।
25 साल की सार्वजनिक सेवा का किया उल्लेख
पीएम मोदी ने कहा कि सात अक्टूबर को उन्हें सरकार के मुखिया के रूप में सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे हुए हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम बनासकांठा के डीसा में लोक कल्याण मेले के रूप में हुआ था। उन्होंने कहा कि गुजरात के लोगों ने उन्हें जनसेवा और राष्ट्रसेवा का रास्ता सिखाया है।