आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होने की जरूरत
एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सही ठहराने के लिए किसी भी तरह का तर्क या बहाना स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इसके बावजूद आतंकवादी गतिविधियां जारी हैं, क्योंकि कुछ देश इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के बजाय अपने राजनीतिक हितों को अधिक महत्व देते हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि इतिहास में आतंकवाद के खतरों से कई सबक मिल चुके हैं, लेकिन कुछ देश अब भी अपने फायदे के आधार पर फैसले लेते हैं। उन्होंने जोर दिया कि अब दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ मजबूत इच्छाशक्ति दिखाने की जरूरत है।
उन्होंने सभी देशों से आतंकवाद के हर रूप और तरीके का मिलकर मुकाबला करने की अपील की। उनके मुताबिक, आतंकवाद के प्रति किसी भी तरह की नरमी वैश्विक शांति की कोशिशों को कमजोर करती है।
प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग पर देना होगा जोर
सम्मेलन में जयशंकर ने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मानव समाज में हमेशा दो तरह की सोच रही है। एक प्रतिस्पर्धा को महत्व देती है, जबकि दूसरी सहयोग को बेहतर रास्ता मानती है। यही सोच देशों के आपसी संबंधों में भी नजर आती है।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब आठ दशक पहले दुनिया ने ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की थी, जिसमें देश साझा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक-दूसरे का सहयोग कर सकें।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 1 का भी जिक्र किया, जिसमें सहयोग की इसी भावना को जगह दी गई है।
शांति, विकास और समृद्धि का आपस में गहरा संबंध
एस. जयशंकर ने कहा कि शांति, विकास और समृद्धि एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। संघर्ष और हिंसा किसी भी समाज की प्रगति में बाधा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के एक हिस्से का समृद्ध होना और दूसरे हिस्से का बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना लंबे समय तक संभव नहीं है।
उनके मुताबिक, देशों को अपने हितों के साथ-साथ पूरी दुनिया की जरूरतों को भी समझना होगा। स्थायी शांति के लिए आपसी सहयोग, बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देना जरूरी है।
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि युद्ध और आतंकवाद किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे सकते। वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।