हाइलाइट्स
• यूपी में 7.55 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी
• GBC 5.0 में शामिल होंगी 6972 परियोजनाएं
• सेवा क्षेत्र में आएगा 3.40 लाख करोड़ का निवेश
• डाटा सेंटर लगाने पर 70 करोड़ तक प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नवंबर के अंत तक होने वाले भूमि पूजन समारोह (GBC 5.0) में 6972 परियोजनाएं शामिल की जाएंगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से 755705 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र में आने की उम्मीद है, जिसके लिए करीब 3.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित है। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र में 2.79 लाख करोड़ और बुनियादी ढांचे में 1.44 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा।
प्रदेश में डाटा सेंटर क्षेत्र भी बड़े निवेश केंद्र के रूप में उभरा है। इसमें अब तक 1.80 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है। इनवेस्ट यूपी ने GBC 5.0 के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। समारोह के लिए इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान और डिफेंस एक्सपो ग्राउंड का चयन किया गया है।
सेवा क्षेत्र में डाटा सेंटर, पर्यटन और शिक्षा पर जोर
GBC 5.0 के लिए तैयार निवेश पोर्टफोलियो में सेवा क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इसमें डाटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), पर्यटन, वित्तीय सेवाएं और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सेवा क्षेत्र में करीब 3.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे पता चलता है कि प्रदेश में निवेश का दायरा पारंपरिक उद्योगों के साथ डिजिटल और ज्ञान आधारित सेवाओं तक भी बढ़ रहा है।
डाटा सेंटर के बाद ऊर्जा और रियल एस्टेट में बड़े निवेश प्रस्ताव
सेक्टरवार निवेश पोर्टफोलियो में डाटा सेंटर के बाद ऊर्जा और रियल एस्टेट की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। ऊर्जा क्षेत्र में 1.15 लाख करोड़ रुपये और रियल एस्टेट में 75 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।
विनिर्माण क्षेत्र के लिए 2.79 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, इस्पात एवं सीमेंट, फार्मा एवं रसायन, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
डाटा सेंटर में निवेश बढ़ने से प्रदेश में सर्वर क्षमता और क्लाउड सेवाओं के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
डाटा सेंटर लगाने पर 70 करोड़ रुपये तक का प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश सरकार की डाटा सेंटर नीति-2026 के तहत निवेशकों को अलग-अलग प्रोत्साहनों का लाभ जोड़कर लेने का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत पात्र निवेशक सामान्य ब्याज उपादान के साथ एआई कंप्यूट बूस्टर और हरित एवं सतत संचालन बूस्टर की शर्तें पूरी करके कुल प्रोत्साहन की सीमा बढ़ा सकते हैं।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा के मुताबिक, इस व्यवस्था में डाटा सेंटर स्थापित करने के साथ एआई कंप्यूटिंग क्षमता और पर्यावरण के अनुकूल संचालन को भी अतिरिक्त लाभ से जोड़ा गया है।
AI और हरित संचालन से बढ़ेगी प्रोत्साहन की सीमा
नीति के तहत यदि किसी निवेशक के लिए सामान्य ब्याज उपादान की आधार सीमा 50 करोड़ रुपये है, तो एआई कंप्यूट बूस्टर अथवा हरित एवं सतत संचालन बूस्टर की संबंधित शर्तें पूरी करने पर इसमें अधिकतम 10-10 करोड़ रुपये की वृद्धि हो सकती है।
दोनों मानकों को पूरा करने पर ब्याज उपादान की अधिकतम सीमा 70 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, अतिरिक्त लाभ पाने के लिए संबंधित शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
बिजली आपूर्ति से लेकर स्टाम्प शुल्क तक कई सुविधाएं
डाटा सेंटर पार्कों के लिए ब्याज उपादान के अलावा भी कई सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इनमें दोहरी ग्रिड से बिजली आपूर्ति, भूमि उपादान, स्टाम्प शुल्क में छूट और ट्रांसमिशन व व्हीलिंग शुल्क से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
हरित एवं सतत संचालन बूस्टर का लाभ लेने के लिए डाटा सेंटर को मान्य ग्रीन प्रमाणन या नीति में स्वीकार्य समकक्ष प्रमाणपत्र हासिल करना होगा।
केवल सामान्य ISO प्रमाणपत्र, स्व-प्रमाणन या मानक ऊर्जा ऑडिट को अपने आप पर्याप्त नहीं माना जाएगा। यानी पर्यावरण के अनुकूल संचालन का दावा करने भर से अतिरिक्त प्रोत्साहन नहीं मिलेगा; इसके लिए नीति में तय मानकों को पूरा करना आवश्यक है।