असम में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके अनुसार राज्य की सभी 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच माना जा रहा है। दोनों ही दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं, लेकिन कांग्रेस को लगातार झटकों का सामना करना पड़ रहा है।
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जिससे संगठन की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में एक बड़ा घटनाक्रम मार्घेरिटा विधानसभा सीट से सामने आया है, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार प्रतीक बोरदोलोई ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनके पिता और वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर BJP का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और कांग्रेस के लिए यह एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
मामले की जानकारी के अनुसार, प्रद्युत बोरदोलोई, जो नगांव से लोकसभा सांसद रहे हैं, ने पहले कांग्रेस से इस्तीफा दिया और फिर BJP में शामिल हो गए। उनके इस फैसले के तुरंत बाद उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई ने भी अपनी राजनीतिक स्थिति पर पुनर्विचार किया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि पारिवारिक और राजनीतिक समीकरण किस तरह चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
अपने पत्र में प्रतीक बोरदोलोई ने साफ तौर पर कहा कि वह पार्टी के प्रति सम्मान रखते हुए यह निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनके पिता के दूसरे दल में शामिल होने के बाद उनके लिए उम्मीदवार के रूप में बने रहना उचित नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के सिद्धांतों और विचारधारा में उनका विश्वास अभी भी कायम है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भरोसा दिलाया कि वह आगे भी संगठन के लिए काम करते रहेंगे और मार्घेरिटा क्षेत्र के विकास में योगदान देंगे। उनका यह बयान बताता है कि व्यक्तिगत परिस्थितियों के बावजूद वह पार्टी से पूरी तरह दूरी नहीं बनाना चाहते।
असम की राजनीति में यह घटनाक्रम काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घटनाएं मतदाताओं की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं। एक ओर BJP अपने संगठन को मजबूत करने और नए नेताओं को शामिल करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस को अपने नेताओं के पलायन से जूझना पड़ रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस घटनाक्रम का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, सभी दल पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और आगामी मतदान को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है।